मोहला-मानपुर में बदहाल शिक्षा व्यवस्था: रंगमंच, सामुदायिक भवन और कचरा केंद्र में पढ़ने को मजबूर बच्चे

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मोहला-मानपुर। CG DASTAK 

छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में शाला भवनों की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। कई गांवों में छात्र-छात्राएं वर्षों से खुले रंगमंच, छोटे सामुदायिक भवनों और यहां तक कि कचरा संग्रहण केंद्र में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

रंगमंच और कचरा केंद्र बने स्कूल

जानकारी के अनुसार, औंधी तहसील के ग्राम आलकन्हार में पिछले पांच वर्षों से खुले रंगमंच में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। वहीं मार्चुल, घोडाझरी और हुरेली गांवों में एक कमरे वाले छोटे सामुदायिक भवनों में स्कूल चल रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति ग्राम बालेर की है, जहां करीब तीन वर्षों से बच्चे टीन शेड वाले कचरा संग्रहण केंद्र में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।

निर्माण कार्य अधूरे, जर्जर भवनों में पढ़ाई

जिले के कई स्कूलों के नए भवन स्वीकृत होने के बावजूद डेढ़ से दो वर्ष बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। वहीं 50 से अधिक स्कूल भवन जर्जर बताए जा रहे हैं, जहां बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं।

प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण वर्षों से शाला भवनों की समस्या बनी हुई है। भवन निर्माण की स्वीकृति मिलने के बाद भी कार्य समय पर पूरा नहीं कराया जा रहा है, जिससे आदिवासी अंचल के बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

भवन निर्माण और सुविधाओं की मांग

ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से जर्जर स्कूल भवनों का तत्काल निर्माण, अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा कराने और बच्चों के लिए सुरक्षित एवं बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है।

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