CG News: 15 करोड़ का स्कूल भवन बना खतरा! दरकती दीवारों और धंसते फर्श के बीच पढ़ने को मजबूर 800 छात्र

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News:रायपुर। CG DASTAK 

राजधानी रायपुर के दलदल सिवनी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 800 छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने स्कूल भवन की हालत कुछ ही वर्षों में इतनी खराब हो गई है कि बच्चे रोज अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, जबकि कई जगह फर्श धंसने लगा है।

15 करोड़ खर्च, फिर भी जर्जर हुआ भवन

जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने वर्ष 2019 में मुख्य भवन और 2023 में अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कर स्कूल प्रबंधन को सौंपा था। दोनों निर्माण कार्यों पर 15 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। बावजूद इसके, महज कुछ वर्षों में भवन की हालत बेहद जर्जर हो गई है।

धंस रहा फर्श, दरक रही दीवारें

स्कूल परिसर में कई कमरों की दीवारों और नींव में गहरी दरारें आ चुकी हैं। कई जगह फर्श धंसने से गड्ढे बन गए हैं। हालात ऐसे हैं कि शिक्षक भी कक्षाओं के बजाय बरामदों में पढ़ाने को मजबूर हैं। कई कमरों से बेंच और कुर्सियां बाहर निकाल दी गई हैं, क्योंकि अंदर बैठना असुरक्षित माना जा रहा है।

छात्र बोले- हर दिन लगता है कहीं आखिरी दिन न हो

विद्यार्थियों ने बताया कि स्कूल भवन की हालत देखकर हर दिन डर बना रहता है। उनका कहना है कि फर्श धंसने से कई बच्चों को चोट भी लग चुकी है। तेज बारिश, आंधी या तूफान के दौरान दीवार गिरने का भय बना रहता है। छात्रों ने सरकार से सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि वे पढ़ाई छोड़ना नहीं चाहते, बल्कि सुरक्षित माहौल में शिक्षा चाहते हैं।

उठ रहे कई गंभीर सवाल

इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

भवन जर्जर होने की जानकारी उच्च अधिकारियों को समय पर क्यों नहीं दी गई?

गर्मी की छुट्टियों के दौरान मरम्मत कार्य क्यों नहीं कराया गया?

करोड़ों रुपये की लागत के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

क्या निर्माण में लापरवाही या भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच होगी?

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

स्कूल भवन की बदहाल स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर इन मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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