
रायपुर। CG DASTAK
किताबों में पढ़े गए नियम तब ज्यादा याद रहते हैं, जब उन्हें जिंदगी से जोड़कर समझाया जाए। कुछ ऐसा ही प्रयास रायपुर के वंडर किड्स अकैडमी, दीनदयाल उपाध्याय नगर शाखा की ओर से किया गया, जहां बच्चों को कक्षा से बाहर निकालकर वास्तविक ट्रैफिक सिग्नल पर यातायात सुरक्षा के नियमों की जानकारी दी गई।
स्कूल के सीनियर क्लास के बच्चों को सरोना ट्रैफिक सिग्नल ले जाया गया। यहां बच्चों ने सिर्फ ट्रैफिक लाइट को देखा नहीं, बल्कि यह भी समझा कि सड़क पर एक छोटी सी गलती कितनी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

🚦 लाल, पीली और हरी बत्ती का मतलब समझा
गतिविधि के दौरान बच्चों को ट्रैफिक सिग्नल की तीनों लाइटों के बारे में बताया गया।
बच्चों ने समझा कि लाल बत्ती का मतलब रुकना, पीली बत्ती सावधानी और हरी बत्ती आगे बढ़ने का संकेत देती है। इसके साथ ही उन्हें स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग का सही इस्तेमाल भी समझाया गया।
बच्चों को बताया गया कि सड़क पार करते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पहले सड़क की स्थिति को देखना और सुरक्षित होने पर ही जेब्रा क्रॉसिंग या निर्धारित स्थान से सड़क पार करना चाहिए। बच्चों को सड़क पार करते समय किसी बड़े व्यक्ति की मदद लेने के महत्व के बारे में भी बताया गया।
सड़क सुरक्षा संबंधी आधिकारिक दिशा-निर्देशों में भी बच्चों को फुटपाथ का इस्तेमाल करने और सड़क पार करते समय जेब्रा क्रॉसिंग अथवा सिग्नल वाले स्थान का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

👦👧 बच्चों ने सीखा—नियम सिर्फ हमारे लिए नहीं
इस गतिविधि का सबसे खास संदेश यह रहा कि यातायात नियम सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बल्कि घर के बड़े लोगों को भी याद दिलाने की जिम्मेदारी बच्चों की हो सकती है।
बच्चों को समझाया गया कि यदि उनके माता-पिता या परिवार का कोई सदस्य ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने की कोशिश करे, तो वे उन्हें विनम्रता से नियमों का पालन करने के लिए कह सकते हैं।
यानी अब बच्चे सिर्फ खुद सड़क सुरक्षा के नियम नहीं सीखेंगे, बल्कि अपने घर में भी सड़क सुरक्षा के छोटे-छोटे संदेशों के वाहक बनेंगे।
❤️ “पापा, हेलमेट जरूर पहनना…”
कल्पना कीजिए—जब कोई बच्चा अपने पिता से कहे, “पापा, हेलमेट पहनकर चलिए…”
या अपनी मां से कहे, “मम्मी, सीट बेल्ट लगा लीजिए…”
तो शायद सड़क सुरक्षा की सबसे बड़ी शुरुआत यहीं से हो सकती है।
बच्चों को दोपहिया वाहन पर हेलमेट और कार में सीट बेल्ट के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। सड़क सुरक्षा अभियानों में हेलमेट, सीट बेल्ट और ट्रैफिक नियमों के पालन को लगातार महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय बताया जाता है।

🚑 बच्चों ने सीखा—इमरजेंसी वाहन को रास्ता देना हमारी जिम्मेदारी
गतिविधि के दौरान बच्चों को यह भी बताया गया कि सड़क पर एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या अन्य आपातकालीन वाहन दिखाई दें तो उन्हें रास्ता देना चाहिए।
क्योंकि उस वाहन में बैठे व्यक्ति के लिए हर सेकंड महत्वपूर्ण हो सकता है।
बच्चों को सड़क पर अनुशासन, सावधानी और दूसरों की सुरक्षा का भी महत्व समझाया गया।
👩🏫 डायरेक्टर एवं प्रिंसिपल पल्लवी मिश्रा ने बताया गतिविधि का उद्देश्य
स्कूल की डायरेक्टर एवं प्रिंसिपल पल्लवी मिश्रा ने बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा की आदतें बचपन से ही विकसित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ किताबों में यातायात नियम पढ़ाने के बजाय वास्तविक ट्रैफिक सिग्नल पर ले जाकर समझाने से वे इन नियमों को ज्यादा बेहतर तरीके से समझते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में उनका पालन करना सीखते हैं।
👮 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने भी किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान मौके पर मौजूद यातायात पुलिसकर्मियों ने भी बच्चों को सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी।
बच्चों ने उत्साह के साथ ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा क्रॉसिंग और स्टॉप लाइन को प्रत्यक्ष रूप से देखा। बच्चों ने यातायात नियमों का पालन करने का संकल्प भी लिया।
रायपुर में यातायात पुलिस पहले भी हेलमेट, सीट बेल्ट और ट्रैफिक सिग्नल के पालन को लेकर जागरूकता अभियान चलाती रही है।

🌱 असली शिक्षा वही, जो जिंदगी में काम आए
वंडर किड्स अकैडमी की यह पहल बच्चों को यह समझाने की कोशिश है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है।
सड़क पर हम सभी की एक जिम्मेदारी है।
एक हेलमेट किसी परिवार की खुशियां बचा सकता है।
एक सीट बेल्ट किसी जिंदगी को बचा सकती है।
एक सिग्नल पर रुकना किसी हादसे को रोक सकता है।
और अगर यह बात बच्चे सीखकर अपने घर तक पहुंचा दें, तो शायद इस छोटी सी पहल का असर स्कूल की चारदीवारी से बहुत आगे तक जा सकता है।
क्योंकि सड़क सुरक्षा सिर्फ एक नियम नहीं… खुद और दूसरों की जिंदगी के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
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