
विधायक आशाराम नेताम ने हरी झंडी दिखाकर 6 वाहनों को किया रवाना, सेवा संकल्प अभियान के तहत जरूरतमंदों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण
उत्तर बस्तर कांकेर, 7 अक्टूबर 2026। किसी के लिए एक कृत्रिम हाथ सिर्फ एक उपकरण हो सकता है, लेकिन उस व्यक्ति के लिए वह दोबारा अपने काम खुद करने की शुरुआत हो सकता है। किसी के लिए कृत्रिम पैर सिर्फ एक सहायक साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर होकर आगे बढ़ने का नया रास्ता हो सकता है।
इसी उम्मीद के साथ कांकेर जिले के 277 दिव्यांग हितग्राहियों का दल बुधवार को जगदलपुर के लिए रवाना हुआ। यह दल सेवा संकल्प अभियान-2026 के तहत आयोजित निःशुल्क दिव्यांग सहायता शिविर में शामिल होगा। जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर में 5 से 7 अक्टूबर तक विशेष शिविर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

🚌 हरी झंडी दिखाकर रवाना किए गए 6 वाहन
कांकेर के न्यू बस स्टैंड स्थित डोम से दिव्यांग हितग्राहियों के दल को रवाना किया गया।
विधायक आशाराम नेताम, नगर पालिका अध्यक्ष अरुण कौशिक, कलेक्टर कुन्दन कुमार, जिला पंचायत CEO हरेश मण्डावी और महेश जैन ने हरी झंडी दिखाकर बस सहित 6 वाहनों को रवाना किया।
इस दौरान विधायक और कलेक्टर ने वाहनों में बैठे दिव्यांग हितग्राहियों को पुष्प भेंट कर स्वस्थ जीवन और शुभ यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

❤️ 277 लोगों के लिए अलग-अलग जरूरत, एक ही उम्मीद
जगदलपुर में आयोजित शिविर में कांकेर जिले के 277 दिव्यांग हितग्राहियों को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।
इनमें:
97 हितग्राहियों को कृत्रिम अंग
180 हितग्राहियों को विभिन्न सहायक उपकरण
प्रदान किए जाएंगे।
कृत्रिम अंग और उपकरणों में जरूरत के अनुसार 38 कृत्रिम हाथ, 59 कृत्रिम पैर, 64 बैसाखियां, 55 श्रवण यंत्र, 43 छड़ियां, 2 कैलिपर्स, 3 वॉकर, 5 वॉकिंग स्टिक, 6 चश्मे सहित अन्य सहायक उपकरण शामिल हैं।
जगदलपुर का यह शिविर व्यापक बस्तर स्तरीय अभियान का हिस्सा है, जिसमें दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, बैसाखी और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

🌱 सिर्फ उपकरण नहीं, आत्मनिर्भरता की कोशिश
इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कृत्रिम अंग या सहायक उपकरण मिलने के बाद कई दिव्यांगजन अपने दैनिक कामों में ज्यादा स्वतंत्र हो सकते हैं।
जगदलपुर शिविर में पहले ही ऐसे हितग्राहियों को कृत्रिम अंग दिए जा चुके हैं। एक मामले में कृत्रिम हाथ मिलने के बाद हितग्राही ने उसी हाथ से पानी की बोतल उठाकर पानी पिया। इस क्षण को वहां मौजूद लोगों ने भावुक अनुभव के रूप में देखा।
यही इस पूरे अभियान का सबसे मानवीय पक्ष है—सहायता सिर्फ सामान देने तक सीमित नहीं, बल्कि व्यक्ति को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश है।
♿ दिव्यांग हितग्राहियों की सुविधा का रखा गया विशेष ध्यान
जिला प्रशासन की ओर से हितग्राहियों को जगदलपुर ले जाने और शिविर के बाद वापस लाने की व्यवस्था की गई है।
वाहनों में व्हीलचेयर सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रत्येक वाहन में दिव्यांग हितग्रियों की सहायता के लिए सहायक नियुक्त किए गए हैं।
यात्रा के दौरान भोजन, पानी और आवश्यक सहयोग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। वाहन में चढ़ने-उतरने, व्हीलचेयर के इस्तेमाल और अन्य जरूरतों में भी सहयोगी कर्मचारी मदद करेंगे।
इससे पहले प्रशासन ने जगदलपुर शिविर के लिए बड़ी संख्या में वाहनों और सहायकों की व्यवस्था की जानकारी दी थी, ताकि दूरदराज के दिव्यांग हितग्राहियों को शिविर तक पहुंचने में परेशानी न हो।
📍 कांकेर के सातों विकासखंडों से पहुंचेंगे हितग्राही
कांकेर जिले के अलग-अलग विकासखंडों से दिव्यांग हितग्राही इस अभियान में शामिल हो रहे हैं।
दिए गए विवरण के अनुसार—
चारामा – 45
नरहरपुर – 39
भानुप्रतापपुर – 38
कांकेर – 37
दुर्गूकोंदल – 48
अंतागढ़ – 36
कोयलीबेड़ा – 18
इसके अलावा नगर पंचायत स्तर से भी हितग्राही शामिल होंगे।
🙏 कोई पात्र व्यक्ति पीछे न रह जाए
कलेक्टर कुन्दन कुमार ने कहा कि संभव है कुछ पात्र दिव्यांगजन किसी कारण से 7 अक्टूबर को जगदलपुर जाने वाले दल में शामिल नहीं हो पाए हों। ऐसे लोगों को निराश होने की जरूरत नहीं है।
जिला प्रशासन के अनुसार 14 और 15 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आयोजित होने वाले शिविर में भी पात्र दिव्यांगजनों को लाभ लेने का अवसर मिलेगा।
इस अभियान का उद्देश्य दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को शासन की योजनाओं से जोड़ना और उनकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराना है।
💬 विधायक बोले—सेवा और सुविधा देना हम सभी की जिम्मेदारी
विधायक आशाराम नेताम ने कहा कि दिव्यांगजनों की सेवा करना और उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने जिला प्रशासन की पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से दिव्यांगजनों को अपने गांव और जिले से बाहर जाकर सुविधा प्राप्त करने में सहयोग मिलता है।
💬 कलेक्टर ने कहा—कोई पात्र व्यक्ति सुविधा से वंचित न रहे
कलेक्टर कुन्दन कुमार ने कहा कि दिव्यांगजनों की सेवा का अवसर जिला प्रशासन के लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने बताया कि हितग्राहियों को शिविर तक पहुंचाने से लेकर व्हीलचेयर, सहायक और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का ध्यान रखा गया है।
प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन शासन की सुविधा से वंचित न रहे।
एक बस कांकेर से निकली है… लेकिन साथ में 277 उम्मीदें भी निकली हैं
किसी को कृत्रिम हाथ मिलेगा।
किसी को कृत्रिम पैर।
किसी को सुनने का यंत्र।
किसी को चलने का सहारा।
लेकिन इन सभी के पीछे एक ही सपना है—जिंदगी को थोड़ा और आसान बनाना और खुद पर निर्भर होकर आगे बढ़ना।
सेवा संकल्प अभियान की यह पहल बताती है कि सरकारी योजना की असली सफलता तब है, जब उसका लाभ उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसे उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
क्योंकि किसी जरूरतमंद के लिए एक उपकरण… सिर्फ उपकरण नहीं, आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हो सकता है।
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