CG News: महासमुंद LPG घोटाले में जांच तेज, मुंबई के 4 लोगों से पूछताछ, 1.5 करोड़ के गबन मामले में खुल रहे नए राज

0
10

महासमुंद। Cg dustak 

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित करीब 1.5 करोड़ रुपये के एलपीजी गैस गबन मामले में महासमुंद पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। फरार आरोपियों को शरण और सहयोग देने वालों तक अब जांच का दायरा पहुंच गया है। इसी कड़ी में पुलिस ने मुंबई के चार लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था, जो गुरुवार को जांच टीम के सामने पेश हुए।

फरार आरोपियों की मदद करने वालों से पूछताछ

पुलिस के अनुसार, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर सार्थक सिंह ठाकुर की फरारी के दौरान सहायता करने के आरोप में जोगेंद्र सिंह, राजू माइकल, राकेश साह और प्रशांत पाटिल को नोटिस जारी किया गया था। पुलिस ने इन सभी से आरोपियों को दी गई आर्थिक, तकनीकी और अन्य प्रकार की सहायता के संबंध में विस्तृत पूछताछ की।

92 मीट्रिक टन एलपीजी बेचकर 90 लाख रुपये कमाने का आरोप

जांच में सामने आया है कि जब्त किए गए 6 गैस कैप्सूलों से लगभग 92 मीट्रिक टन एलपीजी गैस निकालकर करीब 90 लाख रुपये में बेच दी गई थी। इसके बाद पूरे मामले को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी पंचनामा और दस्तावेज तैयार किए गए।

दस्तावेजों और वजन रिकॉर्ड में मिली गंभीर गड़बड़ी

महासमुंद पुलिस की जांच के मुताबिक, तत्कालीन खाद्य अधिकारी अजय यादव और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर ने गैस की मात्रा का आकलन करने के बाद उसे खपाने की कथित साजिश रची। रायपुर निवासी मनीष चौधरी के माध्यम से ठाकुर पेट्रोकेमिकल से संपर्क कर करीब 90 लाख रुपये में सौदा तय किया गया।

जांच एजेंसियों को दस्तावेजों, वजन रिकॉर्ड और अन्य अभिलेखों में गंभीर विसंगतियां मिली हैं, जिससे फर्जीवाड़े और कूट रचना की आशंका और मजबूत हुई है। जांच में आरोपियों के बीच गोपनीय बैठकों और समान बयान देने की रणनीति बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

कई आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में

इस मामले में तत्कालीन खाद्य अधिकारी अजय यादव, भाजपा नेता पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के जिम्मेदार पदाधिकारी सहित कई आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में हैं।

पुलिस का कहना है कि मुंबई से पूछताछ के लिए बुलाए गए लोगों से मिले इनपुट के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

महासमुंद के इस चर्चित एलपीजी घोटाले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य और कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस अब उन सभी व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों को संरक्षण या सहयोग दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here