महासमुंद LPG गबन कांड: 2 महीने से फरार मुख्य आरोपी पिता-पुत्र कोल्हापुर से गिरफ्तार

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महासमुंद। जिले के बहुचर्चित एलपीजी गैस गबन मामले में महासमुंद पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। करीब दो महीने से फरार चल रहे ठाकुर पेट्रो के संचालक संतोष सिंह ठाकुर और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले का खुलासा आज गुरुवार को पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने प्रेसवार्ता में किया।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार रायपुर, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर समेत कई शहरों में ठिकाने बदल रहे थे। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, टावर डंप, सीडीआर विश्लेषण, टोल डेटा और सोशल मीडिया एनालिसिस के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। अंततः कोल्हापुर के एक होटल में दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार किया गया।

एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि इस पूरे मामले में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और संदिग्ध पाई गई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा दिलाने, फर्जी तौल पंचनामा तैयार कराने और गैस स्टॉक को जल्द खाली करवाने की साजिश में अजय यादव की मुख्य भूमिका थी। पुलिस ने उसे इस पूरे खेल का प्रमुख षड्यंत्रकारी बताया है।

पुलिस जांच के मुताबिक, दिसंबर 2025 में जब्त किए गए एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा पर ठाकुर पेट्रो के हवाले किया गया था। आरोप है कि इसके बाद गैस को अवैध तरीके से विभिन्न एजेंसियों और संस्थानों को बिना जीएसटी के बेच दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि अप्रैल महीने में 40 टन एलपीजी की खरीद दिखाई गई, जबकि 135 टन गैस की बिक्री की गई। पुलिस के अनुसार, कुल 87 टन एलपीजी गैस की हेराफेरी की गई जिसकी कीमत लगभग 77 लाख रुपये आंकी गई है।

मामले में पूर्व में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब मुख्य आरोपी पिता-पुत्र की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को और बड़े खुलासों की उम्मीद है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लाकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं।

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