
नई दिल्ली। CG DASTAK
मानसून सत्र से पहले बंगाल की राजनीति में हलचल, लोकसभा में अलग बैठने की मिली अनुमति
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए सांसदों के समूह के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है।
इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने TMC से अलग हुए 20 सांसदों को संसद में अलग बैठने की अनुमति दे दी है। हालांकि, इन सांसदों के नए राजनीतिक समूह को अभी आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।
विपक्ष ने जताई नाराजगी
सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने बागी सांसदों को बुलाए जाने पर आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना था कि जब तक उनके नए समूह को आधिकारिक मान्यता नहीं मिलती, तब तक उन्हें अलग इकाई के रूप में बैठक में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसे लेकर विपक्षी सांसदों ने कुछ समय के लिए वॉकआउट भी किया।
बंगाल चुनाव के बाद बढ़ी नाराजगी
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने अलग होने का फैसला किया। इसके बाद वे नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए।
NCPI एक पंजीकृत राजनीतिक दल है, लेकिन उसे अभी चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त नहीं है। सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि उन्हें संसद में एक अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता दी जाए।
NDA में शामिल होने के संकेत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग हुए सांसदों के समूह ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा भी जताई है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी सुदीप बंद्योपाध्याय को सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
14 जुलाई को सुदीप बंद्योपाध्याय और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर नए समूह की संगठनात्मक संरचना की जानकारी दी थी। इसमें सुदीप बंद्योपाध्याय को फ्लोर लीडर और काकोली घोष दस्तीदार को चीफ व्हिप बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
संसद सत्र से पहले बढ़ी सियासी हलचल
20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले हुए इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समूह NDA में शामिल होता है, तो इसका पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।










