
खड़गवां CG DASTAK
एमसीबी जिले में कथित फर्जी टीकाकरण रिपोर्ट पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

खड़गवां/एमसीबी। एमसीबी जिले में पशुओं के टीकाकरण को लेकर सामने आए कथित फर्जीवाड़े के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पूरे मामले के सार्वजनिक होने के बाद पशुपालन विभाग अचानक सक्रिय हो गया है और जिन गांवों में पहले टीकाकरण नहीं होने की शिकायतें सामने आई थीं, वहां अब विभाग की टीमें पहुंचकर अभियान चला रही हैं।
इस अचानक सक्रियता ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शासन को पहले ही जिले में 100 प्रतिशत टीकाकरण पूर्ण होने की रिपोर्ट भेजी जा चुकी थी, तो अब दोबारा टीकाकरण अभियान चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
खबर के बाद बदले हालात
ग्रामीणों और पशुपालकों का आरोप है कि समाचार प्रकाशित होने से पहले तक कई गांवों में टीकाकरण दल पहुंचे ही नहीं थे। लगातार शिकायतों के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। लेकिन मामला उजागर होते ही विभाग सक्रिय हो गया और अब गांव-गांव टीकाकरण किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले ही टीकाकरण पूरा हो चुका था, तो वर्तमान अभियान किस आधार पर चलाया जा रहा है?
उप संचालक की भूमिका पर सवाल
मामले में जिला पशुपालन विभाग के उप संचालक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कथित फर्जी आंकड़ों की जानकारी होने के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।
यदि बिना वास्तविक टीकाकरण के ही 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्शाकर शासन को रिपोर्ट भेजी गई है, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के साथ सरकारी अभिलेखों में गलत जानकारी प्रस्तुत करने का मामला भी हो सकता है।
सरकारी राशि के उपयोग पर भी उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि यदि रिकॉर्ड में शत-प्रतिशत टीकाकरण दिखाकर उसी आधार पर भुगतान जारी किया गया, तो सरकारी धन के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण अभियान में दवा, परिवहन, मानदेय और अन्य मदों पर सरकारी राशि खर्च होती है। ऐसे में यदि जमीनी हकीकत और रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो वित्तीय जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
किसानों और पशुपालकों ने पूरे जिले के टीकाकरण अभियान की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने निम्न बिंदुओं की जांच कराने की मांग उठाई है—
शासन को भेजी गई टीकाकरण रिपोर्ट
गांववार टीकाकरण रजिस्टर और फील्ड रिकॉर्ड
लाभार्थी पशुपालकों का भौतिक सत्यापन
वैक्सीन उपयोग का रिकॉर्ड
भुगतान और व्यय संबंधी दस्तावेज
संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल पूरे मामले में कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं और अब सभी की निगाहें शासन द्वारा संभावित जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।










