‘यह सर्टिफिकेट हमने जारी नहीं किया’… TI के खुलासे के बाद मचा हड़कंप, शराब दुकानों के जिला समन्वयक पर लगे गंभीर आरोप

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रायपुर। राजधानी रायपुर में संचालित शासकीय शराब दुकानों के संचालन से जुड़ी निजी कंपनी इनोवोसोर्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Innovosource Services Pvt. Ltd.) के जिला समन्वयक परितोष कश्यप को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उनके नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत किए गए पुलिस चरित्र सत्यापन प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

 

मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) सहित अन्य पक्षों द्वारा जिला आबकारी अधिकारी और पुलिस प्रशासन को शिकायत सौंपकर जांच की मांग की गई है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिला समन्वयक पद पर नियुक्ति के दौरान परितोष कश्यप द्वारा एक पुलिस चरित्र सत्यापन प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था। बाद में जब इस दस्तावेज की सत्यता को लेकर संबंधित थाना प्रभारी से जानकारी ली गई तो कथित रूप से बताया गया कि उक्त प्रमाण पत्र उनके कार्यालय से जारी नहीं किया गया है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस पते के आधार पर प्रमाण पत्र जारी दिखाया गया है, वह क्षेत्र संबंधित थाना सीमा से मेल नहीं खाता।

शिकायत में क्या मांग की गई?

जिला आबकारी अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि यदि नियुक्ति के लिए कूटरचित अथवा फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया है तो यह न केवल नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि भविष्य में अन्य नियुक्तियों पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने, संबंधित अधिकारी को पद से हटाने तथा जांच पूरी होने तक जिम्मेदारियों से अलग रखने की मांग की है।

राजनीतिक संगठनों ने भी उठाए सवाल

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) द्वारा दिए गए पत्र में कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। पत्र में चेतावनी भी दी गई है कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जा सकता है।

शराब दुकानों के संचालन पर भी उठे प्रश्न

गौरतलब है कि जिला समन्वयक के पास जिले की कई शराब दुकानों के संचालन और मानव संसाधन प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में दस्तावेजों की सत्यता को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ अन्य व्यक्तियों द्वारा भी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने जैसे आरोप सामने आने की चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति

फिलहाल इस मामले में आधिकारिक जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई का इंतजार है। यदि जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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