
रायगढ़ – रिश्तों को कलंकित करने वाली दर्दनाक घटना में रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के रैरूमा खुर्द गांव के निवासी रतिराम मांझी को अपने ही पुत्र गोपाल मांझी की हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
माननीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री अभिषेक शर्मा ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए ₹1,000 का अर्थदंड भी लगाया और मृतक के परिवार को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति दिलाने की अनुशंसा की।
कैसे हुआ विवाद
19-20 जुलाई 2019 की रात लगभग 1 बजे आरोपी रतिराम मांझी अपने पुत्र गोपाल से दूसरा विवाह करने की बात कह रहा था। पुत्र ने इसका कड़ा विरोध किया। बात बढ़ी, झगड़ा हुआ और दोनों घर से बाहर गांव के हुड़ार झोरखा की तरफ चले गए।
खौफनाक खुलासा –
कुछ देर बाद रतिराम घर लौटा और अपनी बहू गोंदा बाई से सनसनीखेज बात कही –
“गोपाल को हुड़ार झोरखा के पास बहुत मार दिया हूं।”
इसके बाद वह वहां से भाग गया।
गोंदा बाई और चाचा ससुर अनिल मांझी मौके पर पहुंचे तो देखा – गोपाल खून से लथपथ अचेत पड़ा था।
उसके चेहरे पर कई जगह गंभीर चोटें थीं।
तुरंत उसे एम्बुलेंस से पत्थलगांव अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की रिपोर्ट पर थाना पत्थलगांव में मर्ग कायम हुआ और शव पंचनामा के बाद मामला धरमजयगढ़ थाना को सौंपा गया।
चौकी प्रभारी धनीराम राठौर ने सटीक और गंभीर विवेचना करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और धारा 302 आईपीसी के तहत चालान तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने मामले की पैरवी की।
गवाहों के बयान, साक्ष्यों की जांच और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने आरोपी को गोपाल मांझी की हत्या का दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
माननीय न्यायालय ने मृतक के परिजनों को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से दिलाने की अनुशंसा भी की, ताकि उन्हें कुछ आर्थिक सहारा मिल सके।









