छत्तीसगढ़ के तालाबों को ‘छठ घाट’ नाम देने का विरोध, क्रान्ति सेना ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तालाबों और नदी घाटों के नाम बदलकर ‘छठ घाट’ किए जाने के विरोध में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को रायपुर में प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तालाबों और नदी घाटों के मूल एवं ऐतिहासिक नामों को सुरक्षित रखने की मांग की।

संगठन की ओर से रायपुर जिले के विभिन्न थानों, जिलाधीश, पुलिस कमिश्नर और नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें आगामी छठ पर्व से पहले प्रदेश के पारंपरिक जलस्रोतों के नाम बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

पुरखों की विरासत से जुड़े हैं तालाबों के नाम : टिकेश्वर निषाद

छत्तीसगढ़िया युवा क्रान्ति सेना के अध्यक्ष टिकेश्वर निषाद ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न तालाबों और नदी घाटों की अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान है। इन जलस्रोतों के नाम स्थानीय लोकसंस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों की विरासत से जुड़े हुए हैं।

संगठन का कहना है कि इन स्थानों के मूल नामों को बदलकर दूसरे नाम देना प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान के साथ छेड़छाड़ करने जैसा है। इसलिए ऐसे नामकरण पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।

छठ पर्व के आयोजन का विरोध नहीं, नाम बदलने पर आपत्ति

संगठन की पदाधिकारी उषा श्रीवास ने कहा कि छठ पर्व बिहार राज्य का प्रमुख पर्व है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग श्रद्धा और आस्था के साथ मनाते हैं। छत्तीसगढ़ में भी लोग इस पर्व का आयोजन कर सकते हैं, लेकिन धार्मिक आयोजन के नाम पर यहां के पारंपरिक तालाबों और नदी घाटों की मौलिक पहचान तथा ऐतिहासिक नाम बदलना उचित नहीं है।

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने स्पष्ट किया कि प्रवासी समुदाय के लोग छठ पर्व मनाने के लिए प्रदेश के विभिन्न जलस्रोतों और घाटों का उपयोग कर सकते हैं। संगठन की आपत्ति पर्व के आयोजन को लेकर नहीं, बल्कि पारंपरिक जलस्रोतों के मूल नाम बदलकर उन्हें ‘छठ घाट’ नाम देने की प्रवृत्ति को लेकर है।

सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक नाम बचाने की मांग

संगठन के अनुसार, छत्तीसगढ़ के तालाब और नदी घाट केवल पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि स्थानीय समाज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। इनके नामों में क्षेत्र की परंपराओं, इतिहास और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है।

क्रान्ति सेना का कहना है कि इन नामों को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपने क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित रह सकें। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि प्रदेश के तालाबों और नदी घाटों के मूल नामों में बदलाव रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने चेतावनी दी है कि यदि तालाबों और नदी घाटों के मूल नाम बदलने के प्रयास जारी रहते हैं, तो संगठन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और मौलिक पहचान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।

फिलहाल संगठन ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी है। इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या निर्णय सामने आने की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।

स्रोत: छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति, रायपुर।

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