
आरंग। CG DASTAK
खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में धान के आधार बीज (फाउंडेशन सीड) की गुणवत्ता को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र की कुछ कृषि साख सहकारी समितियों से वितरित किए जा रहे धान बीज में कथित रूप से ‘करगा’ (अवांछित घास के बीज) और अन्य अशुद्ध सामग्री मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। किसानों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
किसानों का आरोप है कि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से उपलब्ध कराए गए कुछ बीज पैकेटों में धान के साथ अवांछित बीज और कचरा जैसी सामग्री भी मिली है। इससे बीज की गुणवत्ता और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बुआई के समय बढ़ सकती है परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश किसान बीज की बोरी बुआई या नर्सरी तैयार करने के समय ही खोलते हैं। ऐसे में यदि बीज के साथ करगा या खरपतवार के बीज मौजूद रहे तो वे सीधे खेतों में पहुंच जाएंगे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि करगा जैसी खरपतवार मुख्य फसल से पोषण और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करती है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। साथ ही किसानों को अतिरिक्त खरपतवार नियंत्रण और निंदाई पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
किसानों को सतर्क रहने की सलाह
स्थानीय किसान संगठनों ने किसानों से अपील की है कि बुआई से पहले बीज की अच्छी तरह जांच करें। यदि बीज में करगा, खरपतवार या अन्य अवांछित सामग्री दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित सहकारी समिति, कृषि विभाग या बीज वितरण एजेंसी को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। 
गुणवत्ता नियंत्रण पर उठे सवाल
आधार बीज को बीज उत्पादन श्रृंखला का सबसे शुद्ध और महत्वपूर्ण स्तर माना जाता है। ऐसे में किसानों का सवाल है कि यदि शिकायतें सही हैं तो ग्रेडिंग, परीक्षण और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया के दौरान ऐसी खामियां कैसे रह गईं। किसानों ने संबंधित बीज लॉट की स्वतंत्र जांच कराने और भविष्य में केवल मानक गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन खेती का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है और बीज की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे फसल उत्पादन, लागत और किसानों की आय को प्रभावित कर सकती









