
News:महासमुंद cg dastak
। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ जहां प्रदेशभर में शाला प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं महासमुंद जिले के कई शासकीय स्कूलों की बदहाल स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिले के कई स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। कहीं छत गिरने का डर है, तो कहीं बारिश के दौरान दीवारों में करंट उतरने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई स्कूलों में पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। 
जानकारी के अनुसार, महासमुंद जिले में कक्षा पहली से बारहवीं तक कुल 1,956 शासकीय स्कूल संचालित हैं, जिनमें वर्ष 2025-26 में 1 लाख 41 हजार 503 छात्र अध्ययनरत थे। इनमें से 54 स्कूल पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। प्रशासन ने 2 दिसंबर 2025 को 113 स्कूलों की मरम्मत के लिए 96.39 लाख रुपये स्वीकृत किए थे और कार्य तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन करीब नौ महीने बाद भी केवल 16 स्कूलों का मरम्मत कार्य पूरा हो सका है, जबकि अधिकांश स्कूलों में काम शुरू तक नहीं हुआ। 
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
बागबाहरा ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला भदरसी में भवन जर्जर होने के कारण कई वर्षों से एक अतिरिक्त कक्ष में ही बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। वहीं मोंगरापाली-रेवा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शौचालय, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। स्कूल की छत जर्जर है और कई छात्र जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
छात्रों ने बताई परेशानी
एक छात्रा ने बताया कि वर्षों से जर्जर भवन में पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन अब तक नया भवन नहीं बन पाया। वहीं दूसरी छात्रा ने कहा कि बारिश के दौरान दीवारों में करंट आने और छत से पानी टपकने के कारण डर के साए में पढ़ाई करनी पड़ती है। 
सरपंच ने लगाए लापरवाही के आरोप
मोंगरापाली-रेवा ग्राम के सरपंच खेमराज सिंह ने कहा कि कई बार प्रस्ताव और एस्टीमेट भेजे गए, लेकिन शिक्षा विभाग और प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
शिक्षा विभाग का पक्ष
जिला शिक्षा अधिकारी बीएल देवांगन ने कहा कि जर्जर भवनों का चिन्हांकन कर लिया गया है और निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे भवनों में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी। आवश्यकता पड़ने पर पंचायत भवन या दो पालियों में स्कूल संचालित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य शासन के निर्देशों का पालन कराया जा रहा है।

हालांकि, मरम्मत कार्य की धीमी रफ्तार और नौ महीने में केवल 16 स्कूलों का काम पूरा होना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में “स्कूल आ पढ़े बर, जिनगी ला गढ़े बर” जैसे अभियान की सफलता भी चुनौती बनती नजर आ रही है।









