
गरियाबंद। CG DASTAK
छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व इन दिनों एक रहस्यमयी बाघिन की मौजूदगी को लेकर देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। रायपुर से करीब 160 किलोमीटर दूर स्थित इस टाइगर रिजर्व में एक ऐसी मादा बाघिन की पहचान हुई है, जिसका रिकॉर्ड देश के किसी भी टाइगर डेटाबेस में मौजूद नहीं है।
वन विभाग के अनुसार जनवरी 2026 में पहली बार कैमरा ट्रैप में इस बाघिन की तस्वीर कैद हुई थी। इसके बाद उसके स्ट्राइप पैटर्न का मिलान देशभर के टाइगर रिकॉर्ड से कराया गया, लेकिन किसी भी पंजीकृत बाघ या बाघिन से उसका मेल नहीं मिला।
वैज्ञानिक भी हैरान, नहीं मिला कोई पुराना रिकॉर्ड
बाघिन के स्ट्राइप पैटर्न को वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भेजा गया, लेकिन वहां भी उसकी पहचान नहीं हो सकी। वहीं, जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी में स्कैट (मल) सैंपल की जांच से यह पुष्टि हुई कि यह करीब चार वर्ष की मादा बाघिन है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस बाघिन की मौजूदगी का कोई पुराना कैमरा ट्रैप रिकॉर्ड या आधिकारिक डेटा देश के किसी भी टाइगर रिजर्व में नहीं मिला है।
अप्रैल और मई में फिर कैमरे में हुई कैद
अप्रैल और मई 2026 में कैमरा ट्रैप में दोबारा इसकी तस्वीरें मिलने से यह स्पष्ट हो गया कि बाघिन अभी भी उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में विचरण कर रही है। ऐसे समय में जब इस रिजर्व में बाघों की संख्या को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही थी, इस रहस्यमयी बाघिन की मौजूदगी ने संरक्षण प्रयासों को नई उम्मीद दी है।
प्राकृतिक माइग्रेशन की संभावना
वन अधिकारियों का मानना है कि यह संभवतः प्राकृतिक माइग्रेशन का एक दुर्लभ उदाहरण हो सकता है। हालांकि यह बाघिन आखिर कहां से आई और इतनी लंबी दूरी तय कर यहां कैसे पहुंची, यह अब भी रहस्य बना हुआ है। वन विभाग और वन्यजीव वैज्ञानिक इसकी उत्पत्ति और मूवमेंट का पता लगाने के लिए लगातार अध्ययन कर रहे हैं।








