रायपुर नगर निगम में विकास कार्यों की मंजूरी पर सियासत, भाजपा के 642 और कांग्रेस के सिर्फ 30 प्रस्ताव स्वीकृत होने का दावा

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रायपुर। CG DASTAK 

रायपुर नगर निगम में विकास कार्यों के प्रस्तावों की मंजूरी को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। निगम के उपलब्ध आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर भेदभाव की राजनीति करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा पार्षदों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों को बड़ी संख्या में मंजूरी मिली, जबकि कांग्रेस पार्षदों के प्रस्तावों की स्वीकृति काफी कम रही।

निगम के आंकड़ों के मुताबिक भाजपा पार्षदों की ओर से कुल 785 विकास कार्यों के प्रस्ताव भेजे गए थे, जिनमें से 642 प्रस्ताव मंजूर किए गए। वहीं कांग्रेस पार्षदों की ओर से भेजे गए 285 प्रस्तावों में से केवल 30 प्रस्ताव ही स्वीकृत हुए। इस तरह कुल 1070 प्रस्तावों में से 672 प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की बात सामने आई है।

भाजपा के प्रस्तावों की मंजूरी दर करीब 82 प्रतिशत

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा पार्षदों के 785 प्रस्तावों में से 642 प्रस्ताव स्वीकृत हुए। यानी भाजपा के प्रस्तावों की मंजूरी दर करीब 81.8 प्रतिशत रही। वहीं 143 प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुए।

इसके मुकाबले कांग्रेस पार्षदों के 285 प्रस्तावों में से सिर्फ 30 प्रस्ताव मंजूर हुए। कांग्रेस के अनुसार उसकी मंजूरी दर करीब 10.5 प्रतिशत रही, जबकि 255 प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सके।

इसी अंतर को लेकर कांग्रेस ने नगर निगम में पक्षपात का आरोप लगाया है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने लगाए भेदभाव के आरोप

कांग्रेस जिला अध्यक्ष और पार्षद श्रीकुमार मेनन ने निगम के आंकड़ों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि नगर निगम में विकास कार्यों की मंजूरी में भेदभाव किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रायपुर के कई वार्डों में विकास कार्यों की जरूरत है और जनता से जुड़े प्रस्ताव पार्षदों की ओर से भेजे जाते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा पार्षदों के प्रस्तावों को ज्यादा मंजूरी मिल रही है, जबकि कांग्रेस पार्षदों के प्रस्ताव बड़ी संख्या में लंबित या अस्वीकृत हैं।

श्रीकुमार मेनन ने यह भी दावा किया कि भाजपा पार्षदों के वार्डों में प्रस्ताव मंजूर होने के बावजूद कई जगह जमीनी हालात अपेक्षा के मुताबिक नहीं हैं।

महापौर मीनल चौबे ने आरोपों को किया खारिज

कांग्रेस के आरोपों पर रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने भेदभाव से इनकार किया है। उनका कहना है कि निगम में किसी भी पार्टी के पार्षद के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

महापौर के मुताबिक विकास कार्यों के प्रस्तावों को पार्टी के आधार पर नहीं, बल्कि जनहित और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी के पार्षद द्वारा भेजे गए जनहित से जुड़े कार्यों पर नियमानुसार निर्णय लिया जाता है।

1070 प्रस्तावों में 672 काम मंजूर

नगर निगम के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस पार्षदों की ओर से कुल 1070 विकास कार्यों के प्रस्ताव भेजे गए थे। इनमें से 672 प्रस्तावों को मंजूरी मिली।

आंकड़ों के आधार पर भाजपा के प्रस्तावों की संख्या भी कांग्रेस की तुलना में काफी ज्यादा रही और मंजूरी का अनुपात भी अधिक रहा। यही आंकड़े अब नगर निगम की राजनीति में बहस का विषय बन गए हैं।

फिलहाल कांग्रेस इसे भेदभाव का मुद्दा बता रही है, जबकि महापौर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विकास कार्यों की स्वीकृति पार्टी के आधार पर नहीं, बल्कि जनहित और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर की जा रही है।

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