
बिलासपुर। CG DASTAK
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 1992 से जुड़े 34 साल पुराने मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने तीन डीएसपी के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को शपथ पत्र (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट को अलग से कानूनी चुनौती देने की भी अनुमति दी है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
34 साल पुरानी एफआईआर रद्द करने की लगाई थी याचिका
याचिकाकर्ता मनोहरलाल चौधरी ने हाईकोर्ट में वर्ष 1992 में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिका लंबित रहने के दौरान पुलिस विभाग की जांच में कुछ गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद तीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे।
पहले भी मांगी गई थी कार्रवाई की रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने इससे पहले 17 जून 2026 को डीजीपी से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि 12 जून 2026 को डीजीपी ने राज्य सरकार को अनुशंसा भेजी थी, जिसमें तीनों डीएसपी के खिलाफ लघु दंड (Minor Penalty) देने की सिफारिश की गई है।
फिलहाल यह मामला राज्य सरकार के गृह विभाग के समक्ष विचाराधीन है।
चार्जशीट को चुनौती देने की मिली अनुमति
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जब उन्होंने एफआईआर रद्द करने की याचिका दायर की थी, तब मामले की जांच जारी थी। अब पुलिस ने विवेचना पूरी कर उनके खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में पेश कर दी है।
इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कानून के अनुसार चार्जशीट के खिलाफ अलग से उचित कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्र स्वतंत्रता प्रदान कर दी।
DGP को दाखिल करना होगा नया शपथ पत्र
डिवीजन बेंच ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे नया शपथ पत्र प्रस्तुत कर यह स्पष्ट करें कि 12 जून 2026 की अनुशंसा के आधार पर तीनों डीएसपी के विरुद्ध अब तक क्या अंतिम कार्रवाई की गई है।
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।










