
रायपुर। CG DASTAK
कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता ने मुख्य सचिव से जांच और योजना निरस्त करने की मांग की; RDA का कहना- दावा-आपत्ति आने पर नियमानुसार जांच होगी
रायपुर। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में प्रस्तावित भूखंडों के पुनर्गठन और आवंटन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता एवं चिकित्सक डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार के मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को कचना की जमीन के बदले सड्डू में करीब 23,327 वर्गफीट का भूखंड प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने इस भूखंड की संभावित कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताते हुए पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

यह आरोप RDA की ओर से सितंबर 2026 में लाभांडी, कचना और सड्डू क्षेत्र की प्रस्तावित नगर विकास योजना से संबंधित दस्तावेज और भूखंडों की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद सामने आया है। RDA की आधिकारिक वेबसाइट पर 16 सितंबर को इन क्षेत्रों की टाउन डेवलपमेंट प्लान से संबंधित सीमांकन और फाइनल प्लॉट अलॉटमेंट से जुड़े दस्तावेज प्रकाशित किए गए है
कचना की जमीन के बदले सड्डू में प्लॉट देने का आरोप
डॉ. राकेश गुप्ता का दावा है कि राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की कचना क्षेत्र में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। उनके अनुसार, इस जमीन के बदले कंपनी को सड्डू में प्लॉट नंबर 25 प्रस्तावित किया गया है। इस प्लॉट का क्षेत्रफल करीब 2,168 वर्गमीटर यानी 23,327 वर्गफीट बताया गया है।
डॉ. गुप्ता का कहना है कि प्रस्तावित भूखंड MR-43 सड़क के पास है और भविष्य में सड़क तथा क्षेत्र के विकास के बाद यहां जमीन की कीमत काफी अधिक हो सकती है। उन्होंने अनुमान के आधार पर इसकी संभावित कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई है।

हालांकि, यह 20 करोड़ रुपये का आंकड़ा शिकायतकर्ता का अनुमान है। भूखंड का वास्तविक बाजार मूल्य सरकारी मूल्यांकन, भूमि उपयोग, सड़क निर्माण, विकास की स्थिति और बाजार दर जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
एक किलोमीटर दूर भूखंड मिलने पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50 के प्रावधानों का हवाला देते हुए भूखंड के स्थान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुनर्गठन के बाद मूल भू-स्वामी को दिया जाने वाला अंतिम भूखंड सामान्य तौर पर मूल जमीन या उसके आसपास के क्षेत्र में होना चाहिए।
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डॉ. गुप्ता का आरोप है कि संबंधित कंपनी की मूल जमीन कचना में है, जबकि प्रस्तावित भूखंड सड्डू में है और दोनों स्थानों के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी बताई जा रही है। इसी आधार पर उन्होंने आवंटन प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
प्रमुख सड़क से हटाकर अंदरूनी प्लॉट देने का भी आरोप
डॉ. गुप्ता ने योजना के अन्य भू-स्वामियों के आवंटन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ भू-स्वामियों को प्रस्तावित MR-43 जैसी प्रमुख सड़क से जुड़े भूखंड मिलने के बजाय योजना के अंदरूनी हिस्सों में जमीन दी गई है।
उन्होंने पूरे भूखंड पुनर्गठन और आवंटन की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर योजना को निरस्त करने और पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
RDA ने क्या कहा?
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक RDA की ओर से कहा गया है कि अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। RDA CEO अवनीश शरण ने कहा कि यदि दावा-आपत्ति आती है तो संबंधित कमेटी नियमानुसार उसकी जांच करेगी और उसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
RDA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी सितंबर में कचना, लाभांडी और सड्डू के लिए प्रस्तावित टाउन डेवलपमेंट प्लान से संबंधित सार्वजनिक सूचनाएं जारी की गई हैं। इसका मतलब है कि योजना से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उन पर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के माध्यम से सवाल उठाए जा सकते हैं।
आरोपों पर मंत्री पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं
मामले में उपलब्ध रिपोर्टों में मंत्री केदार कश्यप या उनकी पत्नी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। इसलिए फिलहाल इस पूरे मामले को आरोप और प्रस्तावित आवंटन से जुड़े सवालों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आरोपों की सत्यता और आवंटन प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं, यह संबंधित दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल विवाद के मुख्य बिंदु हैं—मूल जमीन कचना में होने के बावजूद सड्डू में प्रस्तावित भूखंड, भूखंड के स्थान और आकार, संभावित बाजार मूल्य तथा RDA की पुनर्गठन प्रक्रिया। आने वाले समय में दावा-आपत्ति और प्रशासनिक जांच के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।









