
बिलासपुर/कोरबा। CG DASTAK
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने वर्ष 1999 से अब तक के कोयला लिंकेज, परिवहन, वाशरी संचालन और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की; SECL को ज्ञापन सौंपा
बिलासपुर/कोरबा। ACB समूह से जुड़ी कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और रेलवे साइडिंग से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने SECL मुख्यालय बिलासपुर के सामने धरना-प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने वर्ष 1999 से वर्तमान तक के रिकॉर्ड की CBI जांच के साथ उच्चस्तरीय SIT, बहु-विभागीय तकनीकी जांच और वित्तीय एवं डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट की मांग रखी है। इस प्रदर्शन की जानकारी 24 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में भी धरने की पुष्टि हुई है।

पार्टी के संयोजक-अध्यक्ष दीपक दुबे के अनुसार, मांग केवल किसी एक इकाई तक सीमित नहीं है। इसमें दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, चकाबुरा, रतिजा, रेंकी और बिंझारी सहित संबंधित कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, परिवहन व्यवस्था और रेलवे साइडिंग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।
कोयले के उत्पादन और परिवहन का वर्षवार मिलान कराने की मांग
पार्टी ने प्रत्येक वाशरी की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन/कोयला प्रसंस्करण का वर्षवार मिलान कराने की मांग की है। इसके साथ ही कच्चे कोयले, धुले कोयले, मध्यवर्ती उत्पाद, रिजेक्ट, गाद और सूक्ष्म कणों के परिवहन तथा अंतिम भंडारण का वैज्ञानिक हिसाब जांचने की मांग रखी गई है।
ज्ञापन में तौल कांटों, सर्वर, GPS, FASTag, RFID, ANPR, CCTV, रेलवे रेक, वाहन रिकॉर्ड और प्रेषण दस्तावेजों की डिजिटल जांच की मांग भी शामिल है। पार्टी का कहना है कि इन रिकॉर्ड के मिलान से कोयले की मात्रा और परिवहन से जुड़े वास्तविक आंकड़ों की जांच की जा सकती है।
10 किलोमीटर क्षेत्र में प्रदूषण और स्वास्थ्य सर्वे की मांग
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने दीपका क्षेत्र में वाशरियों, ताप विद्युत संयंत्रों, रेलवे साइडिंग और भारी कोयला परिवहन से प्रभावित लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र में वायु, धूल, राख, शोर, भूजल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य का स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग भी की है।
इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों द्वारा जल दोहन और अपशिष्ट/गाद निस्तारण से संबंधित रिकॉर्ड की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
पेसा, भूमि और ग्रामसभा के रिकॉर्ड की जांच की मांग
पार्टी के पदाधिकारी संजय रत्नाकर ने कोरबा क्षेत्र में PESA प्रावधानों से जुड़े ग्रामसभा रिकॉर्ड, औद्योगिक गतिविधियों में इस्तेमाल की जा रही भूमि, वन एवं सामुदायिक संसाधनों तथा परियोजना विस्तार से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग रखी।
ज्ञापन में ग्रामसभा की कार्यवाही, सहमति और परियोजनाओं के विस्तार से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन कराने की बात कही गई है।
डीजल, बायोडीजल और सरकारी प्रोत्साहनों की जांच
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पार्टी ने 1 जनवरी 2015 से वर्तमान तक औद्योगिक डीजल/HSD और बायोडीजल की खरीद, भंडारण, परिवहन और उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की है।
इसके अलावा संबंधित कंपनियों को मिले कर छूट, औद्योगिक प्रोत्साहन, विद्युत शुल्क में छूट तथा अन्य सरकारी लाभों की भी जांच की मांग की गई है।
वाशरी, परिवहन, रेलवे साइडिंग और ताप विद्युत संयंत्रों में काम करने वाले श्रमिकों से संबंधित वेतन, न्यूनतम मजदूरी, PF, ESI, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, दुर्घटना रिकॉर्ड और ठेका श्रम नियमों के पालन की भी जांच की मांग की गई है।
पार्टी ने यह भी कहा कि जांच केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। संबंधित SECL, पर्यावरण, खनन, राजस्व, वन, श्रम और अन्य नियामक विभागों के अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण और कार्रवाई के रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए।
डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
पार्टी ने तौल कांटा सर्वर, GPS, FASTag, ANPR, CCTV, RFID, OCEMS/CEMS, ERP/SAP, ईंधन रिकॉर्ड, रेलवे रिकॉर्ड और वित्तीय डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि जांच के दौरान रिकॉर्ड में किसी तरह के बदलाव या नुकसान की आशंका न रहे।
आगे आंदोलन की चेतावनी
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यदि CBI/SIT अथवा राज्य सरकार की ओर से जांच दल गठित कर कार्रवाई नहीं की जाती है तो पार्टी ने 2 अक्टूबर को कोरबा कलेक्टर कार्यालय के सामने 24 घंटे की गांधीवादी न्याय भूख हड़ताल, 22 अक्टूबर से SECL मुख्यालय बिलासपुर के सामने अनिश्चितकालीन धरना और 1 नवंबर को केंद्रीय कोयला मंत्री के आवास के सामने प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
धरने को INTUC के राष्ट्रीय अध्यक्ष रजनीश सेठ और आम आदमी पार्टी के सचिव डॉ. सुनील राज किरण सहित अन्य लोगों ने समर्थन देने की बात कही। प्रदर्शन में पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
महत्वपूर्ण: ACB समूह और SECL से जुड़े भ्रष्टाचार, कोयला हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोप पार्टी के दावे/जांच की मांग हैं। उपलब्ध स्रोतों में इन सभी आरोपों को किसी जांच एजेंसी या अदालत द्वारा सिद्ध किए जाने की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच के बाद ही सामने आएगा।









