युद्ध के साये में तीन महीने: होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे रहे रायपुर के मर्चेंट नेवी अधिकारी रुद्रांश चौबे

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रायपुर। CG DASTAK

समुद्र के बीचों-बीच खड़ा एक कार्गो शिप, चारों तरफ युद्ध का साया, आसमान में मंडराते ड्रोन, दहाड़ते फाइटर जेट और सिर के ऊपर से गुजरती मिसाइलें। यह किसी फिल्मी कहानी का दृश्य नहीं, बल्कि रायपुर के युवा मर्चेंट नेवी अधिकारी रुद्रांश चौबे की वास्तविक जीवन की दास्तान है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रुद्रांश चौबे करीब तीन महीने तक दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंसे रहे। यूरिया लेकर कतर से रवाना हुआ उनका कार्गो जहाज अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था, लेकिन अचानक बदलते भू-राजनीतिक हालात ने पूरी स्थिति बदल दी।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते समुद्री गतिविधियां प्रभावित हो गईं और होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद हो गया। इसके कारण रुद्रांश का जहाज समुद्र के बीच ही रुक गया। हर गुजरते दिन के साथ खतरा और अनिश्चितता बढ़ती गई।

रुद्रांश बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उनके जहाज के ऊपर से लगातार मिसाइलें और ड्रोन गुजरते थे। आसपास फाइटर जेटों की आवाजें गूंजती रहती थीं। हर पल यही डर बना रहता था कि कहीं युद्ध की आग उनके जहाज तक न पहुंच जाए। उन्होंने बताया कि कई ऐसे जहाज भी दिखाई दिए जो बाहर से सामान्य दिखते थे, लेकिन हमलों के कारण उनके पिछले हिस्से जल चुके थे। I

उन्होंने कहा कि जब भी किसी जहाज पर हमला होता था, उसकी जानकारी रेडियो के माध्यम से मिल जाती थी। ऐसे कठिन हालात में जहाज के कप्तान ने सभी क्रू मेंबर्स को एक ही सलाह दी थी— खुद को काम में व्यस्त रखो। यही सलाह पूरे दल की सबसे बड़ी ताकत बनी और भय तथा तनाव के माहौल में भी सभी ने संयम बनाए रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।

समुद्र के बीच फंसे रहने के दौरान रुद्रांश लगातार अपने परिवार के संपर्क में रहे। हजारों किलोमीटर दूर उनका परिवार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना करता रहा। हालांकि उन्होंने कभी भी अपने परिवार को वास्तविक खतरे का अंदाजा नहीं होने दिया।

रुद्रांश के पिता डॉ. विजय कुमार चौबे बताते हैं कि बेटा जब भी फोन करता था, खुद को पूरी तरह सुरक्षित बताता था। परिवार को उसकी चिंता तो रहती थी, लेकिन उसने कभी तनावपूर्ण हालात की जानकारी नहीं दी। रायपुर लौटने के बाद ही उसने उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया, जिनका सामना वह पिछले तीन महीनों से कर रहा था।

फिलहाल रुद्रांश चौबे अवकाश पर अपने परिवार के साथ रायपुर में समय बिता रहे हैं। हालांकि उनका जहाज अब भी उसी क्षेत्र में मौजूद है। भविष्य में उन्हें दोबारा ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है, लेकिन उनकी अगली पोस्टिंग उसी क्षेत्र में होगी या नहीं, यह अभी तय नहीं है।

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