
सूरजपुर।cg dastak

जिला चिकित्सालय स्थित मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में एक गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि प्रसव से पहले इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके चलते जच्चा और बच्चा दोनों की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल है।
मृतका के पति सूरज मानिकपुरी ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर की लापरवाही के कारण उनकी पत्नी और अजन्मे बच्चे की मौत हुई है। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

घटना को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। कांग्रेस नेता पंकज तिवारी अपने समर्थकों के साथ सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
वहीं आरोपों के घेरे में आईं डॉ. गरिमा ने स्वीकार किया है कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद मरीज की स्थिति अचानक बिगड़ने लगी थी। उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद महिला और उसके गर्भस्थ शिशु को बचाया नहीं जा सका।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर रेना जमील ने पोस्टमार्टम के लिए तीन डॉक्टरों की टीम गठित की है। टीम पोस्टमार्टम के साथ बिसरा भी सुरक्षित रखेगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर विस्तृत जांच कराई जा सके। इसके अलावा सीएमएचओ डॉ. के.डी. पैकरा ने पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे मामले की सच्चाई सामने आ सके।










