
थाने में टैंकरों को सुरक्षा की दृष्टि से पेट्रोकेमिकल कंपनी भेजा गया था
वाहन मालिक ने खाली टैंकरों को लेने से इंकार कर गैस चोरी की शिकायत की
थाना सिंघोड़ा में बीते दिसंबर माह में गैस से भरे हुए 06 एलपीजी कैप्सूल टैंकर वाहन जब्त किये गए थे, जिन्हें वापस प्राप्त करने के लिए वाहन स्वामी ने पहले सरायपाली न्यायालय में आवेदन दिया। वहाँ से राहत न मिलने पर उसने उच्च न्यायालय की शरण ली। अंततः उच्च न्यायालय से जमानत के साथ वाहन को सुपर्द करने का आदेश जारी किया गया। इस बीच लगभग 3 माह तक वाहन थाने में ही खड़े रहे और वाहनों की सुपुर्दगी लेने के लिए आने के कुछ दिनों पूर्व ही टैंकर वहाँ से गायब हो गए। थाना प्रभारी द्वारा टैंकरों को खाद्य विभाग के सुपुर्द करने की बात वाहन स्वामी को बताई गई। जबकि, खाद्य विभाग के द्वारा थाने में ही चर्चा करने के लिए कहा गया। इस प्रकार कुछ दिनों तक दोनों विभागों द्वारा वाहन स्वामी को गोलमोल जवाब देते हुए परेशान किया गया और टैंकरों के बारे में उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई। इससे तंग आकर वाहन स्वामी ने वाहनों में लगे जीपीएस की सहायता से वाहनों का पता लगाया तो उन्हें यहाँ से लगभग 200 किलोमीटर दूर अभनपुर के एक निजी कंपनी में टैंकरों के होने की जानकारी मिली। वहाँ पहुँचकर देखने पर टैंकरों से गैस ही गायब थी। जबकि टैंकर जब्ती के समय उसमें गैस भरा हुआ था। अब वाहन स्वामी पर टैंकरों को उसी हालत में वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि आखिरकार लाखों की कीमत का हजारों किलोग्राम गैस कहाँ गायब हो गयी?
तीन माह तक टैंकर थाने में खड़े रहे तो ऐन सुपुर्दगी से पहले ही उसे क्यों हटा दिया गया? थाना प्रभारी व खाद्य विभाग ने वाहन स्वामी को सही जानकारी क्यों नहीं दी? वाहन स्वामी द्वारा कलेक्टर महासमुंद से गैस चोरी की शिकायत की गई है। जिसकी जाँच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार आवेदक टैंकरों के पंजीकृत स्वामी एम.एस. एवरग्रीन ट्रेलर सर्विस प्रो. के. सुब्रमन्यम द्वारा कलेक्टर महासमुंद को दिये आवेदन के अनुसार तीन एलपीजी टेंकर वाहन क्रमांक सीजी 07 सीएस 7244, सीजी 07 सीएस 7245 एवं सीजी 07 सीएस 1663 को थाना सिंघोड़ा जिला महासमुंद के अपराध क्रमांक 96/2025 व दांडिक प्रकरण क्रमांक 67/2026, शासन विरुद्ध प्रकाश गुप्ता वगैरह अंतर्गत धारा 305 ई. 287 3 (5) भारतीय न्याय सहिंता एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3,7 के अनुसंधान में 24/12/2025 को कागजात जब्त कर थाना सिंघोड़ा में रखा गया था। आवेदक द्वारा भूपेंद्र कुमार साहू को उपरोक्त तीनों एलपीजी वाहन को सुपुर्दनामा में प्राप्त करने हेतु आम मुख्यार नियुक्त कर सरायपाली न्यायालय में सर्वप्रथम 5 जनवरी 2026 को आवेदन प्रस्तुत किया गया। खारिज किये जाने पर उनके द्वारा अतिरिक्त सत्र न्यायालय सरायपाली के समक्ष पुनरीक्षण आवेदन प्रस्तुत किया गया, वहां से 16 फरवरी 2026 को निरस्त किया गया। उक्त आदेश से क्षुब्ध होकर आवेदक ने वाहनों को सुपुर्दनामा में प्राप्त करने हेतु उच्च न्यायालय बिलासपुर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया। उच्च न्यायालय के द्वारा 6 अप्रैल 2026 को प्रति वाहन 20 लाख रूपए के व्यक्तिगत बंधपत्र (जमानतदार) व निजी मुचलका के साथ आवेदक/सुपुर्ददार को दिए जाने का निर्णय पारित किया गया।
उक्त आदेश के परिपालन में वाहन का सुपुर्दनामा प्राप्त करने आवेदक 9 अप्रैल 2026 को थाना सिंघोड़ा पहुँचा। जहाँ उन्हें वाहन को 2-3 दिन बाद ले जाने की बात कही गई। 3 दिन बाद पुनः जाने पर थाना प्रभारी द्वारा वाहनों को सुरक्षार्थ खाद्य विभाग के सुपुर्द करने की बात कहकर 2-3 दिन और इंतजार करने कहा गया। 6 दिन बाद पुनः जाने पर उन्हें खाद्य विभाग से संपर्क करने कहा गया। इसी तरह जब आवेदक ने खाद्य विभाग महासमुंद से संपर्क किया, तो उनके द्वारा उन्हें थाना प्रभारी सिंघोड़ा से संपर्क करने कहा गया। इस प्रकार 4-5 दिनों तक थाना प्रभारी व खाद्य अधिकारी गोलमोल जवाब देकर उन्हें घुमाते रहे और वाहन को सुपुर्दनामे में नहीं दिया गया। आवेदक को संदेह होने पर उन्होंने अपने तीनों वाहनों को जीपीएस से ट्रैक किया तो उन्हें ज्ञात हुआ कि वाहन स्वामी को बिना जानकारी दिये वे वाहन एक निजी कंपनी ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड में भेज दिये गए हैं
इस जानकारी के बाद 17 अप्रैल को आवेदक द्वारा थाना प्रभारी सिंघोड़ा और खाद्य अधिकारी से चर्चा करने पर आनन फानन में उसी दिन वाहन सुपुर्दनामे के लिए दो पुलिस स्टाफ उपलब्ध कराकर उन्हें उक्त निजी कंपनी में भेज दिया गया। वाहन प्राप्त करने के लिए उन्हें एक गेट पास के साथ घोषणा पत्र भरने के लिए दिया गया, जिससे उन्हें संदेह होने पर उन्होंने तीनों वाहनों को दिखाने का आग्रह किया। वाहनों को देखने पर टैंकरों के वाल्व (सुरक्षा सील) टूटे मिले। जहाँ से गैस लोडिंग व अनलोडिंग होता है। कंपनी के कर्मचारी से पूछने पर उसने वाहन उसी अवस्था में प्राप्त होने की बात कही। आवेदक द्वारा वाहनों की जाँच करने पर पाया कि उसमें से गैस निकाला जा चुकी है, जबकि थाना सिंघोड़ा द्वारा जब्ती के दौरान तीनों वाहनों में कुल लगभग 53 हजार किलोग्राम गैस भरी हुई थी। आवेदक ने कलेक्टर को दिये पत्र में लिखा है कि गैस न होने की जानकारी देने पर थाना प्रभारी सिंघोड़ा एवं खाद्य अधिकारी महासमुंद द्वारा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाया गया और आवेदक पर वाहनों को उसी स्थिति में ले जाने के लिए दबाव बनाया गया। आखिरकार वाहन स्वामी ने अभी तक वाहनों को सुपुर्दनामा पर प्राप्त नहीं किया है। शिकायतकर्ता वाहन स्वामी द्वारा संबंधित मामले की जाँच करने और आरोपियों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई किये जाने और कुल 52930 किलोग्राम गैस उन्हें वापस दिलाने की मांग की गई है। जिसकी कीमत लाखों में है।
*सुरक्षा की दृष्टि से अभनपुर भेजा-दुबे*
इस संबंध में खाद्य अधिकारी सरायपाली अविनाश दुबे से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि खाद्य विभाग की केवल उपस्थिति में वाहनों को थाना सिंघोड़ा द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स अभनपुर के सुपुर्द किया गया था। टैंकरों में गैस था या नहीं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
गैस चोरी की शिकायत मिली है, जाँच होगी श्रीमती प्रतिभा पांडे, एएसपी, महासमुंद
कैप्सूल टैंकरों से गैस की चोरी हो रही थीं। लिहाजा टैंकरों का नोजल खुला था। ऐसी स्थिति में टैंकरों को थाना परिसर में रखना सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम भरा था। फिर खाद्य विभाग की सलाह पर सभी टैंकरों को पेट्रोकेमिकल कंपनी अभनपुर भेजा गया। वाहन स्वामी ने टैंकरों से गैस चोरी की शिकायत की है। जिसकी जाँच कराई जा रही है।










