
नई दिल्ली। CG DASTAK
नई दिल्ली। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, देश में कैंसर की 543 दवा ब्रांडों और पैक की कीमतों में बदलाव किया गया है। इनमें से 397 दवाओं की कीमतों में कमी की गई है। बताया गया है कि 217 दवाओं की कीमतें आधी से भी कम हो गई हैं। इस बदलाव से कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
दवाओं की कीमतों को लेकर यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब महंगे इलाज और दवा कंपनियों के मुनाफे पर लगातार चर्चा हो रही है।
397 दवाओं की कीमतें घटीं
रिपोर्ट के मुताबिक, 543 कैंसर दवा ब्रांडों और पैक में से 397 की कीमतों में कटौती की गई है। इनमें 97 दवाओं की कीमतें 70 प्रतिशत से अधिक और 50 दवाओं की कीमतें 80 प्रतिशत से अधिक घटने का दावा किया गया है। पांच दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी बताई गई है।
हालांकि, सभी दवाओं की कीमतों में कटौती एक समान नहीं है। कुछ दवाओं की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है। मरीजों को वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा इस सूची में शामिल है या नहीं।
कुछ दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती का दावा
स्क्रीनशॉट में दी गई जानकारी के अनुसार, सैमेपाया इंजेक्शन की कीमत ₹80,071 से घटाकर ₹7,150 किए जाने का उल्लेख है। वहीं, पैल्बोसाइक्लिब की 21 कैप्सूल वाली दवा के एक पैक की कीमत ₹40,421 से घटाकर ₹2,720 होने की बात कही गई है।

इन उदाहरणों को प्रकाशित करने से पहले दवा का सही नाम, उसकी मात्रा, पैक का विवरण और संशोधित कीमत आधिकारिक सूची से मिलाना जरूरी है। अलग-अलग ब्रांड, डोज और पैक की कीमतों में अंतर हो सकता है।
दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतों और उन पर होने वाले मुनाफे का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में भी उठ चुका है। उपलब्ध रिपोर्ट में बताया गया है कि अदालत ने दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और कंपनियों से लेकर रिटेलर तक पहुंचने के बीच कीमतों के अंतर पर सवाल किए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह भी चिंता जताई कि जब कुछ दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर होता है, तो उसका असर मरीजों की जेब पर पड़ सकता है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में इलाज लंबे समय तक चल सकता है, इसलिए दवाओं की कीमतें परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन जाती हैं।
एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर भी नियम
रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार ने 137 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। ट्रेड मार्जिन वह अंतर है जो दवा की खरीद कीमत और उसकी बिक्री कीमत के बीच होता है।

इस तरह के नियमों का उद्देश्य दवाओं की बिक्री व्यवस्था में कीमतों को नियंत्रित करना और मरीजों को राहत पहुंचाना है। हालांकि, किसी दवा पर कौन-सा मूल्य नियंत्रण लागू होता है, यह उसकी श्रेणी और संबंधित सरकारी आदेश पर निर्भर करता है।
दवा की कीमत कैसे तय होती है?
भारत में दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आवश्यक दवाओं की सूची और लागू मूल्य नियंत्रण आदेशों के तहत कुछ दवाओं की अधिकतम कीमत तय की जाती है। दूसरी ओर, गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतों पर अलग नियम लागू हो सकते हैं।

इसलिए किसी दवा की कीमत में बदलाव की जानकारी के लिए संबंधित दवा का नाम, पैक, मात्रा और लागू मूल्य आदेश देखना जरूरी है।
मरीज क्या ध्यान रखें?
कैंसर की दवाओं की कीमतों में कमी की खबर से मरीजों को राहत की उम्मीद जरूर है, लेकिन दवा बदलने या उपचार में बदलाव करने का निर्णय स्वयं न लें। मरीज अपने डॉक्टर और पंजीकृत फार्मासिस्ट से दवा के सही ब्रांड, डोज और नई कीमत की पुष्टि कर सकते हैं।

नोट: इस खबर में दवाओं की संख्या, कीमतों और लागू होने की तारीख से संबंधित आंकड़ों को प्रकाशित करने से पहले NPPA या संबंधित सरकारी अधिसूचना से सत्यापित किया जाना चाहिए।









