एग्रीस्टैक पंजीयन, टोकन में देरी सहित धान खरीदी में व्याप्त अव्यवस्था का मुद्दा विधायक चातुरी नंद ने विधानसभा में उठाया

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विधायक चातुरी नंद ने सायं सरकार पर किसान विरोधी होने का लगाया बड़ा आरोप

सरायपाली : विधायक चातुरी नंद ने एग्रीस्टैक पंजीयन, टोकन में देरी सहित धान खरीदी में व्याप्त अव्यवस्था का मुद्दा ध्यानाकर्षण के माध्यम से विधानसभा में उठाया।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक 100 के माध्यम से विधायक श्रीमती चातुरी नंद द्वारा उठाए गए मुद्दों और शासन द्वारा दिए गए लिखित जवाबों ने प्रदेश की किसान नीति, धान खरीदी व्यवस्था और डिजिटल प्रक्रियाओं की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। सरकार एक ओर किसानों को सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत किसानों की बदहाली और प्रशासनिक अव्यवस्था की कहानी बयां कर रही है।

शासन के जवाब के अनुसार प्रदेश में किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, राज्य की समितियों में 37,835 क्विंटल बीज का भंडारण तथा 16,992 क्विंटल बीज का वितरण किया गया है। धान उपार्जन हेतु एकीकृत किसान पोर्टल में 27.37 लाख किसानों का पंजीयन किया गया, जबकि धान विक्रय के लिए आवश्यक एग्रीस्टैक पोर्टल में 26.85 लाख किसानों का पंजीयन दर्शाया गया है।

सरकार के अनुसार दिनांक 11.12.2025 तक 6.43 लाख किसानों द्वारा 32.77 लाख टन धान का विक्रय किया गया तथा 6,35,000 किसानों को 7,667 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल देय राशि का लगभग 98 प्रतिशत बताया गया है।

लेकिन इन्हीं आंकड़ों के बीच महासमुंद जिले से एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। महासमुंद जिले के किसान श्री मनबोध पिता श्री रामलाल (पंजीकृत रकबा 0.51 हेक्टेयर) को टोकन जारी नहीं होने के कारण धान बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। समिति से बार-बार संपर्क के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिससे मानसिक प्रताड़ना के चलते किसान द्वारा आत्महत्या का प्रयास किया गया। प्रशासन के अनुसार उन्हें तत्काल उपचार हेतु मेकाहारा, रायपुर रेफर किया गया और वर्तमान में उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है।

सरकार यह भी दावा कर रही है कि सरायपाली विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत तिहारीपाली उपार्जन केंद्र में आज दिनांक 12.12.2025 तक 366 किसानों से 2072.24 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। बावजूद इसके भगत सरायपाली और कलेडा के किसानों कि बड़ी संख्या में “सुगंधित श्रेणी” में डालकर धान बेचने से वंचित किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सिस्टम की खामियों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

विधायक चातुरी नंद ने कहा कि प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, गिरदावरी और टोकन व्यवस्था को बिना पर्याप्त तैयारी और जिम्मेदारी तय किए लागू किया गया। न तो सहकारी समितियों और कृषि विभाग के अधिकारियों को समुचित प्रशिक्षण दिया गया, न ही किसानों को इन जटिल प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक किया गया। परिणामस्वरूप किसान तहसील, सोसायटियों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्था और तकनीकी खामियों के कारण लाखों किसान आज भी धान बेचने से वंचित हैं। यह स्थिति न केवल किसान विरोधी है, बल्कि गंभीर सामाजिक संकट को भी जन्म दे रही है।

विधायक चातुरी नंद ने मांग की कि टोकन, एग्रीस्टैक और डिजिटल क्रॉप सर्वे की खामियों को तत्काल दूर किया जाए। इसके साथ जिन किसानों का पंजीयन हो चुका है, उन्हें बिना भेदभाव के धान बेचने का अवसर दिया जाए।उन्होंने किसान आत्महत्या मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों की के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो किसानों का आक्रोश और पीड़ा आने वाले समय में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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