
दिल्ली CG DASTAK
दिल्ली समेत 7 राज्यों को नोटिस, पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग के आरोपों पर निष्पक्ष जांच व साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश।
खबर:
नई दिल्ली। NEET पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित हिंसा और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणियां की हैं। अदालत ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाओं के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए ऐसे छात्रों को राहत देने की मांग की गई थी, जिनके खिलाफ प्रदर्शन से पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस संबंध में अंतरिम निर्देश दिए और कहा कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित राज्यों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष दायर याचिकाओं में पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के गंभीर आरोप लगाए गए। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि पेलेट गन के इस्तेमाल से एक 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी चली गई, इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया गया, एक युवती ICU में भर्ती हुई और कीलों लगी लाठियों से हमला किया गया। इसके अलावा मीडिया कर्मियों से मारपीट और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा के भी आरोप लगाए गए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच अभी जारी है।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान करीब 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और कुछ को टांके भी लगे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि हिंसा में असामाजिक तत्व शामिल हो सकते हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
निष्पक्ष जांच पर कोर्ट का जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। अदालत ने यह भी कहा कि जवाबदेही तय किए बिना जांच का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग कर संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया। इन आरोपों पर अदालत ने सभी साक्ष्य सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।










