
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा में ACB ग्रुप, उससे संबंधित कोलवाशरियों और पावर प्लांटों के साथ SECL से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने 30 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी ने जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपकर कोयला लिंकेज, रिजेक्ट कोल, कोलवाशरी विस्तार, बिजली उत्पादन और पर्यावरणीय अनुपालना से जुड़े मामलों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
पार्टी के पदाधिकारियों ने यह भी घोषणा की कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो 3 नवंबर 2026 को रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित आगमन के दौरान काले झंडे दिखाकर लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराया जाएगा।
यह घोषणा पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में की गई है। ज्ञापन में CBI जांच, संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) के गठन और संबंधित अभिलेखों के तकनीकी ऑडिट की मांग भी शामिल है।
कोलवाशरी और पावर प्लांट के रिकॉर्ड के मिलान की मांग
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भारतीय जनाधिकार पार्टी के अध्यक्ष एवं संयोजक दीपक दुबे ने कहा कि ACB ग्रुप और उससे संबंधित कोलवाशरियों तथा पावर प्लांटों को लेकर लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों और जांच एजेंसियों के समक्ष शिकायतें प्रस्तुत की जा रही हैं।
पार्टी की मांग है कि कोलवाशरियों की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन की जांच की जाए। इसके साथ ही कोयला लिंकेज के तहत प्राप्त कोयले की मात्रा, गुणवत्ता और उपयोग का हिसाब भी सार्वजनिक किया जाए।
दीपक दुबे के अनुसार, कोयले की प्राप्ति से लेकर वाशरी में प्रोसेसिंग, स्वच्छ कोयले, मिडलिंग्स, रिजेक्ट कोल, स्लरी और परिवहन तक के रिकॉर्ड का मिलान होना चाहिए। जिस कोलवाशरी से रिजेक्ट कोल निकलने का दावा किया जाता है, वहां के रिकॉर्ड की संबंधित पावर प्लांट में वास्तविक ईंधन खपत से तुलना की जानी चाहिए।
पार्टी ने वेटब्रिज, स्टॉक रजिस्टर, डिस्पैच और परिवहन रिकॉर्ड का स्वतंत्र तकनीकी एवं फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है।
रिजेक्ट कोल और बिजली उत्पादन की जांच की मांग
पार्टी पदाधिकारियों ने रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की मात्रा और बिजली उत्पादन के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की।
प्रेस विज्ञप्ति में सवाल उठाया गया है कि कोलवाशरी से निकलने वाले रिजेक्ट कोल और मिडलिंग्स की वास्तविक मात्रा कितनी है तथा संबंधित पावर प्लांटों में इनका कितना उपयोग होता है।
पार्टी ने ईंधन की प्राप्ति, खपत, बिजली उत्पादन और ग्रिड में बिजली भेजने से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग की है। साथ ही आरोप लगाया है कि संबंधित इकाइयों में कोयला लिंकेज और ईंधन उपयोग की पूरी जानकारी की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
इन मामलों में लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति से नहीं होती है। संबंधित विभागों और कंपनियों का पक्ष मिलने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

प्रदूषण और पर्यावरणीय अनुपालना की जांच की मांग
धरने के दौरान कोलवाशरियों और पावर प्लांटों से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दे भी उठाए गए। पार्टी ने जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, फ्लाई ऐश, ऐश डाइक, स्लरी और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रबंधन की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की।
पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि कोरबा देश के प्रमुख कोयला और ऊर्जा क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यहां के जल, भूमि, पर्यावरण और सार्वजनिक संसाधनों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
ज्ञापन में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (CCO), SECL, खान एवं भूविज्ञान विभाग, जिला प्रशासन और अन्य तकनीकी संस्थाओं की संयुक्त टीम गठित कर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है।

SECL से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र जांच की मांग
पार्टी नेताओं ने SECL से संबंधित कोयला परिवहन, टेंडर, भुगतान, स्टॉक और संविदा संबंधी शिकायतों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उनका कहना है कि शिकायतों पर केवल पत्राचार या आवेदन अग्रेषित किए जाने की जानकारी पर्याप्त नहीं है। संबंधित अभिलेखों की जांच कर निष्कर्षों को पारदर्शी तरीके से सामने लाया जाना चाहिए।
पार्टी ने मांग की है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर CBI जांच की आवश्यकता पर निर्णय लिया जाए। साथ ही संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग पर भी कार्रवाई हो।
कमल साव ने कार्रवाई में देरी पर उठाए सवाल
धरने को संबोधित करते हुए किसान श्रमिक नेता कमल साव ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतें, ज्ञापन और अभ्यावेदन देने के बावजूद प्रमुख सवालों पर ठोस एवं पारदर्शी कार्रवाई की जानकारी नहीं मिल रही है।
उन्होंने कहा कि जनता को केवल शिकायतों के अग्रेषण की जानकारी देने के बजाय वास्तविक जांच और उसके निष्कर्षों से अवगत कराया जाना चाहिए।
युवा मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय रत्नाकर, महामंत्री शैलेन्द्र गोपाल, जिला संयोजक दिनेश यादव और जिलाध्यक्ष सूरजभान दास बैरागी सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी जांच और जवाबदेही की मांग रखी।
3 नवंबर को अमित शाह के दौरे पर काले झंडे दिखाने का ऐलान
पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष विन्देश सिंह राठौर और प्रदेश सचिव मुकेश भारतीय ने कहा कि 23 सितंबर 2026 को SECL मुख्यालय, बिलासपुर में हुए धरना-आंदोलन के दौरान भी विरोध की घोषणा की गई थी।
उनके अनुसार, यदि ACB ग्रुप और SECL से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो छत्तीसगढ़ आने वाले केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों के समक्ष काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
इसी क्रम में पार्टी ने 3 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के समापन समारोह के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित रायपुर आगमन पर काले झंडे दिखाने की घोषणा की है।
पार्टी का कहना है कि इस विरोध का उद्देश्य संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई की मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाना है। अमित शाह के दौरे के कार्यक्रम और विरोध की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि प्रकाशन से पहले की जानी चाहिए।
किन इकाइयों के रिकॉर्ड की जांच चाहती है पार्टी?
पार्टी के प्रवक्ता कृष्णा टंडन ने कहा कि ACB ग्रुप से संबंधित कोलवाशरियों और पावर प्लांटों की स्थापना से लेकर वर्तमान समय तक की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने MCCPL, रतिजा कोलवाशरी और बंधाखार स्थित 1×300 मेगावाट पावर प्लांट के अभिलेखों के समग्र फोरेंसिक ऑडिट की मांग की।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि रिजेक्ट कोल के स्थान पर लिंकेज से प्राप्त कोयले के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी ने संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कराने और जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि कोयला लेवी से संबंधित मामलों और कथित अवैध कोयला गतिविधियों की जांच में पारदर्शिता होनी चाहिए। इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित दस्तावेज इस प्रेस विज्ञप्ति के साथ उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
अनुसूचित जाति के युवा नेता एवं प्रदेश संयोजक हेमंत पैगवार ने कहा कि कोरबा में कोयला और ऊर्जा से जुड़े मामलों में सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पार्टी की प्रमुख मांगों में संबंधित कोलवाशरियों और पावर प्लांटों की स्वतंत्र तकनीकी जांच, कोयला लिंकेज और रिजेक्ट कोल का संपूर्ण हिसाब, बिजली उत्पादन के रिकॉर्ड का सत्यापन, पर्यावरणीय जांच तथा SECL से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र जांच शामिल हैं।
पार्टी ने जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
धरना-प्रदर्शन में प्रभु कश्यप, पुष्पेंद्र यादव, गंगा प्रसाद, संतोष कुमार, बजरंग रत्नाकर, शिव कुमार, छतराम यादव, सुनील कुमार, खिलेश्वर कश्यप, भीम यादव, संतोष यादव, अजय सूर्यवंशी सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
फिलहाल, भारतीय जनाधिकार पार्टी ने संबंधित मामलों में स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, CBI जांच और संयुक्त SIT गठन की मांग की है। आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित विभागों के आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।









