
रायपुर। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना रायपुर जिला द्वारा आयोजित नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘अदरा लदका’ पीरदा (भिंभौरी) में संपन्न हुआ। एक दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में संगठन के सेनानियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, नैतिकता, संगठनात्मक कार्यप्रणाली और समाज का नेतृत्व करने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य नए सेनानियों को संगठन की विचारधारा, कार्यशैली और अनुशासन से परिचित कराना है। इसके साथ ही उन्हें सामाजिक दायित्वों के निर्वहन और नेतृत्व की भूमिका के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया।
क्या है ‘अदरा लदका’ प्रशिक्षण कार्यक्रम?
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के अनुसार, ‘अदरा लदका’ संगठन का नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इसके माध्यम से सेनानियों को संगठनात्मक गतिविधियों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों से संबंधित विषयों की जानकारी दी जाती है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने अलग-अलग सत्रों में प्रशिक्षण दिया। सेनानियों को विषम परिस्थितियों में धैर्य, दृढ़ता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की क्षमता विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
संगठन का कहना है कि इस तरह के प्रशिक्षण का उद्देश्य सेनानियों के कौशल को विकसित करना और उन्हें समाजहित में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार करना है।
अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर दिया गया जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुशासन, नैतिकता और संगठनात्मक प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण विषयों के रूप में शामिल किया गया। संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सेनानियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने और सामाजिक दायित्वों को समझने के लिए प्रेरित किया गया।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना विभिन्न क्षेत्रों में रुचि और दक्षता रखने वाले सेनानियों की नेतृत्व क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। संगठन का उद्देश्य उन्हें छत्तीसगढ़ के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार करना है।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय यादव ने दिया संदेश
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा के लिए समर्पित प्रशिक्षित सेनानियों का व्यापक संगठन है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा कि संगठन ने छत्तीसगढ़ यानी जल-जंगल-जमीन, छत्तीसगढ़ी भाषा-संस्कृति और छत्तीसगढ़िया समाज के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए काम करने का संकल्प लिया है।
उन्होंने सेनानियों से संगठन के उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने और समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
जल-जंगल-जमीन और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण पर जोर
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने अपने उद्देश्यों में जल-जंगल-जमीन, छत्तीसगढ़ी भाषा-संस्कृति और छत्तीसगढ़िया समाज के संरक्षण एवं संवर्धन को प्रमुखता दी है।
संगठन के मुताबिक, प्रशिक्षण कार्यक्रम सेनानियों को इन उद्देश्यों के प्रति जागरूक करने और सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने का एक माध्यम है।
पीरदा (भिंभौरी) में आयोजित यह एक दिवसीय कार्यक्रम प्रशिक्षण सत्रों और समापन संबोधन के साथ संपन्न हुआ। संगठन की ओर से जारी जानकारी में कार्यक्रम को सेनानियों की अनुशासनात्मक समझ, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया है।
संगठनात्मक प्रशिक्षण की दिशा में नियमित पहल
संगठन के अनुसार, ‘अदरा लदका’ कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। इसके माध्यम से नए सेनानियों को संगठन की कार्यप्रणाली से परिचित कराने और उन्हें सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए तैयार करने का प्रयास किया जाता है।
कार्यक्रम में शामिल विषयों के जरिए सेनानियों को धैर्य, दृढ़ता, नैतिकता और जिम्मेदारी के साथ काम करने का संदेश दिया गया।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना रायपुर जिला का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पीरदा (भिंभौरी) में संपन्न हुआ। इसकी जानकारी संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी गई।
जारीकर्ता: फार्मासिस्ट राहुल वर्मा, केंद्रीय मीडिया प्रभारी, छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना, रायपुर, छत्तीसगढ़।









