बलौदाबाजार में पटवारियों का काला दिवस, वेतन विसंगति और पदोन्नति की मांग पर आंदोलन तेज

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बलौदाबाजार। CG DASTAK

बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ में पटवारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में धरने पर बैठे पटवारियों ने काले कपड़े पहनकर काला दिवस मनाया और शासन के खिलाफ विरोध जताया। संघ की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगति दूर करना, पदोन्नति देना और पीवी ऐप की जगह भुइंया ऐप से गिरदावरी का काम कराना शामिल है।

पटवारी संघ 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। आंदोलन के तहत पुरुष पटवारी काली शर्ट और टी-शर्ट पहनकर पहुंचे, जबकि महिला पटवारियों ने काली साड़ी और सूट पहनकर विरोध दर्ज कराया। संघ ने रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की भी तैयारी की है।

पीवी ऐप की जगह भुइंया ऐप से गिरदावरी कराने की मांग

पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष रसपाल सिंह ने पीवी ऐप की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐप में कई खामियां हैं, जिनका असर गिरदावरी के काम पर पड़ सकता है। संघ का दावा है कि इन समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आगे किसानों को भी परेशानी हो सकती है।

रसपाल सिंह के मुताबिक, पटवारियों ने ऐप को लेकर अपनी आपत्तियां शासन के सामने रखी थीं, लेकिन अब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ है। संघ की मांग है कि शासन पटवारी प्रतिनिधियों से बातचीत कर पीवी ऐप की खामियां दूर करे या फिर भुइंया ऐप से गिरदावरी का काम जारी रखे।

वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति की मांग

पटवारी संघ की दूसरी प्रमुख मांगों में वेतन विसंगति दूर करना और पदोन्नति देना शामिल है। संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर समाधान नहीं निकलने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

रसपाल सिंह ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते गिरदावरी से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो धान खरीदी के दौरान किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि तहसीलदार स्तर के अधिकारी भी पटवारियों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं।

पटवारी संघ ने बताया किसान हित का आंदोलन

संघ की प्रवक्ता रश्मि उपाध्याय ने कहा कि पटवारी काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि उनकी मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंच सकें। उन्होंने धान खरीदी की प्रस्तावित तारीख 15 नवंबर का हवाला देते हुए कहा कि गिरदावरी का काम समय पर पूरा नहीं होने से किसानों को दिक्कत हो सकती है।

रश्मि उपाध्याय के मुताबिक, पटवारी किसान और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए संघ की मांगों को केवल कर्मचारियों से जुड़ा मामला नहीं माना जाना चाहिए। संघ का कहना है कि गिरदावरी व्यवस्था में आने वाली तकनीकी समस्याओं का असर किसानों पर भी पड़ सकता है।

कनिष्ठ प्रशासनिक संघ ने भी दिया समर्थन

पटवारी संघ के आंदोलन को कनिष्ठ प्रशासनिक संघ का समर्थन भी मिला है। जानकारी के मुताबिक, बीते दिनों संघ के प्रांताध्यक्ष पेखन टोण्डे अपने साथियों के साथ बलौदाबाजार के दशहरा मैदान स्थित धरना स्थल पहुंचे थे। उन्होंने पटवारियों की मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन को समर्थन दिया।

शासन के फैसले पर टिकी नजरें

पटवारी संघ अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। काला दिवस मनाने के साथ संघ ने रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की तैयारी की है।

अब देखना होगा कि शासन की ओर से पटवारियों की मांगों पर बातचीत और समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। वहीं, गिरदावरी और धान खरीदी से जुड़े कामों पर आंदोलन का क्या असर पड़ता है, इस पर भी नजर रहेगी।

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