
रायपुर। CG DASTAK
छत्तीसगढ़ में पिछले दो दशकों के दौरान कई हाईप्रोफाइल मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई, लेकिन अधिकांश मामलों में या तो जांच वर्षों तक लंबित रही, या फिर अदालत में दोष सिद्ध नहीं हो सका। कुछ मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई, कुछ में प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों से पूछताछ हुई, लेकिन कई प्रकरणों में आज भी अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है। ऐसे में कोरिया के नौगई ट्रिपल मर्डर केस की CBI जांच पर पूरे प्रदेश की नजरें टिक गई हैं।
जोगी सरकार से शुरू हुआ CBI जांच का दौर
छत्तीसगढ़ गठन के बाद अजीत जोगी सरकार के कार्यकाल में दो बड़े मामलों की जांच CBI को सौंपी गई।
ब्लैक सी जाली दस्तावेज मामला (2003): तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी पर कथित फर्जी IB दस्तावेज भेजने के मामले में CBI ने चार्जशीट दाखिल की, लेकिन वर्षों बाद भी अंतिम निर्णय नहीं आ सका।
रामअवतार जग्गी हत्याकांड: भाजपा सरकार बनने के बाद CBI जांच हुई। ट्रायल कोर्ट ने कई आरोपियों को सजा दी, जबकि अमित जोगी बरी हुए। बाद में हाईकोर्ट ने उम्रकैद सुनाई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है।
रमन सरकार के दौरान कई चर्चित मामलों की जांच
रमन सिंह सरकार के दौरान कई बड़े मामलों की जांच CBI को सौंपी गई।
1.पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड: वर्षों की जांच के बाद भी हत्यारों के खिलाफ निर्णायक साक्ष्य नहीं मिले।
पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड: हाईकोर्ट के आदेश पर CBI जांच हुई, लेकिन परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहा है।
कलर डॉपलर घोटाला: कई अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन अंतिम दोषसिद्धि अब तक नहीं हुई।
ताड़मेटला-मोरपल्ली आगजनी मामला: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच हुई, CBI ने चार्जशीट और क्लोजर रिपोर्ट पेश की।
सेक्स सीडी कांड: लंबी सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने 2025 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बरी किया। बाद में अपील के बाद मामला फिर न्यायिक प्रक्रिया में है।
2019 में CBI की एंट्री पर लगी रोक
वर्ष 2019 में तत्कालीन राज्य सरकार ने CBI की जनरल कंसेंट (General Consent) वापस ले ली थी। इसके बाद CBI केवल अदालत के आदेश या राज्य सरकार की विशेष अनुमति मिलने पर ही नए मामलों की जांच कर सकती थी। 2024 में नई सरकार बनने के बाद यह सहमति फिर बहाल कर दी गई।
वर्तमान में CBI के बड़े केस
CGPSC भर्ती घोटाला

2020-22 भर्ती घोटाले में CBI ने पूर्व अध्यक्ष, अधिकारियों और रिश्तेदारों के खिलाफ कार्रवाई कर 2000 से अधिक पन्नों की चार्जशीट पेश की है। जांच जारी है।
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CBI ने राज्य के 71 मामलों की जांच अपने हाथ में ली है। कई राज्यों में छापेमारी हुई है। मनी ट्रेल, हवाला और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है।
बिरनपुर हिंसा
CBI ने चार्जशीट में इसे राजनीतिक साजिश मानने से इनकार किया। भुवनेश्वर साहू हत्याकांड का ट्रायल जारी है, जबकि रहीम और ईदुल मोहम्मद हत्याकांड में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
दिव्यांग कल्याण फंड घोटाला
हाईकोर्ट के आदेश पर CBI जांच जारी है। मामले में एक मंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं।
IAS बीएल अग्रवाल रिश्वत मामला
CBI ने चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन अदालत में आरोप साबित नहीं हो सके और सभी आरोपी बरी हो गए।
अब कोरिया ट्रिपल मर्डर पर नजर

राज्य सरकार ने हाल ही में कोरिया जिले के नौगई ट्रिपल मर्डर केस की जांच CBI को सौंप दी है। 16-17 जून की रात भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार समेत तीन लोगों की हत्या कर वाहन में आग लगा दी गई थी। पुलिस इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और रेत उत्खनन विवाद को हत्या की वजह बता चुकी है।
अब CBI इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करेगी। प्रदेश में पहले के लंबित और चर्चित मामलों को देखते हुए यह जांच भी चर्चा का विषय बनी हुई है










