CG High Court: पिछड़ा वर्ग आयोग पैसे की रिकवरी का आदेश नहीं दे सकता, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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बिलासपुर। CG DASTAK 

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग केवल सलाह और सिफारिश देने वाली संस्था है। आयोग को किसी भी व्यावसायिक (कमर्शियल) विवाद में पैसों की रिकवरी का आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है।

कमला मोटर्स की याचिका पर सुनवाई

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कमला मोटर्स द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला हार्वेस्टर मशीन की खरीद-बिक्री से जुड़े विवाद का था।

याचिका के अनुसार, 21 लाख रुपये में हार्वेस्टर बेचने का सौदा हुआ था, जिसके लिए 30 हजार रुपये एडवांस दिए गए थे। तय समय में बैंक फाइनेंस नहीं मिलने और कोविड-19 के कारण डिलीवरी में देरी से सौदा पूरा नहीं हो सका। बाद में फाइनेंस स्वीकृत होने पर वाहन उपलब्ध कराया गया, लेकिन खरीदार ने सौदा रद्द कर आयोग सहित विभिन्न अधिकारियों से शिकायत कर दी।

आयोग ने दिया था रिकवरी का आदेश

शिकायत पर सुनवाई करते हुए 23 सितंबर 2022 को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने कलेक्टर को निर्देश दिया था कि कमला मोटर्स से 1,26,500 रुपये की वसूली कर खरीदार को भुगतान कराया जाए।

कमला मोटर्स ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि आयोग के पास ऐसा आदेश देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995 की धारा-9 का हवाला देते हुए कहा कि आयोग की भूमिका सलाहकार और सिफारिशी है। आयोग की सिफारिशें सामान्य परिस्थितियों में राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन उसे न्यायिक या सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां प्राप्त नहीं हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच या पूछताछ के लिए कुछ सीमित सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आयोग किसी व्यक्ति से धन वसूली का आदेश जारी कर सकता है।

आयोग ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दिया आदेश

हाईकोर्ट ने कहा कि यह विवाद एक व्यावसायिक लेन-देन से जुड़ा था। ऐसे मामले में आयोग द्वारा ₹1,26,500 की रिकवरी का आदेश देना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इसलिए आयोग का आदेश कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

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