
भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और भावनाओं का प्रतीक भी है। हर घर में किसी न किसी रूप में सोना जरूर होता है—चाहे वह गहनों के रूप में हो, सिक्कों में या फिर बार के तौर पर। लेकिन यह भी सच है कि ज्यादातर सोना सालों तक लॉकर में बंद रहता है और उससे कोई आर्थिक फायदा नहीं मिलता। अब इसी निष्क्रिय सोने को सक्रिय संपत्ति में बदलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) को और आकर्षक बनाने की तैयारी कर रहा है।
इस योजना के तहत आप अपने सोने को बैंक में जमा कर सकते हैं और उस पर ब्याज कमा सकते हैं। अभी तक इस स्कीम में करीब 2 से 2.5 प्रतिशत तक का ब्याज मिलता है, लेकिन खबर है कि इसे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें भाग लें। RBI का मानना है कि भारत में लगभग 20,000 टन से अधिक सोना घरों और संस्थानों में पड़ा हुआ है, जिसे अगर आर्थिक धारा में लाया जाए तो यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है।
कैसे काम करती है गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम?
गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत व्यक्ति अपने सोने (ज्वेलरी, सिक्के या बार) को अधिकृत बैंकों या कलेक्शन सेंटर्स में जमा करता है। जमा करने के बाद सोने की शुद्धता की जांच होती है और फिर उसके अनुसार आपको एक सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। यह जमा एक तरह का ‘गोल्ड डिपॉजिट’ होता है, जिस पर तय अवधि के अनुसार ब्याज मिलता है।
इस योजना में तीन तरह की अवधि होती है—शॉर्ट टर्म (1-3 साल), मीडियम टर्म (5-7 साल) और लॉन्ग टर्म (12-15 साल)। मैच्योरिटी के समय आपको या तो उतने ही वजन का सोना वापस मिल सकता है या फिर उसकी मौजूदा कीमत के अनुसार नकद भुगतान भी लिया जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि इस स्कीम में टैक्स से जुड़े कई फायदे भी मिलते हैं, जैसे कि कैपिटल गेन टैक्स और वेल्थ टैक्स से राहत।
RBI इस स्कीम को फिर से आकर्षक इसलिए बना रहा है क्योंकि पहले इसमें लोगों की भागीदारी उम्मीद से कम रही थी। अब ब्याज दर बढ़ाने, प्रक्रिया को आसान बनाने और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अगर यह बदलाव सफल होते हैं, तो यह योजना आम लोगों के लिए एक सुरक्षित और लाभदायक निवेश विकल्प बन सकती है।

इस स्कीम का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे देश को सोने के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में से एक है। जब लोग अपना सोना बैंक में जमा करेंगे, तो उसी सोने का उपयोग ज्वेलरी इंडस्ट्री या अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। हालांकि, इस योजना में शामिल होने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे कि जमा किए गए गहनों को पिघलाकर शुद्ध सोने में बदला जाता है, इसलिए भावनात्मक मूल्य वाले आभूषणों को जमा करने से पहले सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। साथ ही, ब्याज दर और लॉक-इन पीरियड को ध्यान में रखना भी जरूरी है। कुल मिलाकर, RBI की यह पहल घरों में पड़े निष्क्रिय सोने को एक कमाई के साधन में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर आप भी अपने सोने को सिर्फ सुरक्षित रखने के बजाय उससे कमाई करना चाहते हैं, तो यह स्कीम आपके लिए एक स्मार्ट विकल्प साबित हो सकती है।









