
– ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से कृषि मंत्री रामविचार नेताम से पूछे तीखे सवाल
– कृषि उपसंचालक महासमुंद के खिलाफ कई नोटिस मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का लगाया आरोप
सरायपाली विधायक श्रीमती चातुरी नंद ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से प्रदेश में अनुदान पर कृषि यंत्र और ट्रैक्टर वितरण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, निजी कंपनियों की भूमिका तथा कृषि विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को मिलने वाले अनुदानित कृषि यंत्रों की व्यवस्था पारदर्शी नहीं है और इससे किसानों को भारी परेशानी हो रही है।
ध्यानाकर्षण के जवाब में कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों को चैम्प्स (CHAMPS) प्रणाली के माध्यम से कृषि यंत्रों का वितरण किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1600 ट्रैक्टर और 1877 शक्ति चालित कृषि यंत्र जैसे पावर टिलर, हार्वेस्टर, कल्टिवेटर, वीडर और रिपर किसानों को अनुदान पर दिए गए। वहीं वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 175 ट्रैक्टर और 754 शक्ति चालित कृषि यंत्रों का वितरण किया गया है।
मंत्री ने यह भी बताया कि ट्रैक्टर पंजीयन को लेकर प्राप्त शिकायतों के बाद राज्य शासन ने 1 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर वर्ष 2025-26 के लिए प्राप्त सभी ऑनलाइन आवेदनों को निरस्त कर दिया था और नए सिरे से आवेदन करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 3 सितंबर 2025 को चैम्प्स पोर्टल से सभी पुराने ट्रैक्टर प्रकरण निरस्त किए गए तथा 9 अक्टूबर 2025 से नए पंजीयन शुरू किए गए। साथ ही कृषि यंत्र वितरण प्रक्रिया की जांच के लिए 10 जून 2025 को चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, जिसका प्रतिवेदन शासन को प्राप्त हो चुका है।
हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विधायक चातुरी नंद ने सदन में कहा कि प्रदेश में कृषि यंत्र वितरण की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है और इसमें निजी कंपनियों को विशेष लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि दो निजी ट्रैक्टर कंपनियों को विशेष सुविधा क्यों दी जा रही है और चैम्प्स प्रणाली में किसान सीधे ऑनलाइन आवेदन क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
विधायक चातुरी नंद ने यह भी पूछा कि पिछले विधानसभा सत्र में सरकार ने चैम्प्स प्रणाली को बंद कर नई पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक नई व्यवस्था लागू क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि चैम्प्स 2 प्रणाली के लिए क्या गाइडलाइन जारी की गई है और इसे कब तक लागू किया जाएगा। इस पर कृषि मंत्री द्वारा स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
इसी दौरान विधायक चातुरी नंद ने मंत्री से यह भी पूछा कि चैम्प्स पोर्टल का संचालन और देखरेख कौन कर रहा है। मंत्री ने जानकारी दी कि पोर्टल का तकनीकी संचालन गुजरात की एक कंपनी द्वारा किया जा रहा है। इस पर विधायक चातुरी नंद ने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार को यह जिम्मेदारी किसी निजी कंपनी को देने के बजाय राज्य की आईएनसी (एनआईसी) जैसी सरकारी एजेंसी को देना चाहिए था, लेकिन सरकार ने एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने का काम किया है।
विधायक चातुरी नंद ने प्रेस विज्ञप्ति में बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी के एक शीर्षस्थ नेता के रिश्तेदार की कंपनी को चैम्प्स पोर्टल के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा हो जाता है।
इसके साथ ही उन्होंने महासमुंद जिले के कृषि विभाग में भी अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिला महासमुंद के उपसंचालक कृषि के खिलाफ कई मामलों में नोटिस जारी होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमएफ मद से कृषि स्पेयर पार्ट्स की खरीदी में भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन पाया गया, इसके बावजूद संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
विधायक चातुरी नंद ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि“प्रदेश के किसान अनुदानित कृषि यंत्रों के लिए परेशान हैं, जबकि पूरी प्रक्रिया में निजी कंपनियों की मनमानी दिखाई दे रही है। चैम्प्स प्रणाली के कारण किसान सीधे आवेदन करने से वंचित हैं और कंपनियों का दबाव साफ नजर आता है। सरकार को तुरंत पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था लागू करनी चाहिए तथा जिन अधिकारियों और कंपनियों पर अनियमितता के आरोप हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के हितों से जुड़े इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी ताकि किसानों को उनका अधिकार और पारदर्शी व्यवस्था मिल सके।










