विधायक चातुरी नंद ने विधानसभा में उठाया सिंचाई परियोजनाओं के स्वीकृति में देरी, बिलानाला जलाशय मुआवजा भुगतान में विलंब, धान उठाव में देरी सहित कई मुद्दे

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सरायपाली, 11 मार्च 2026 : सरायपाली विधायक श्रीमती चातुरी नंद ने बजट सत्र में सरायपाली क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए शासन का ध्यानाकर्षण कराया है। विधायक चातुरी नंद द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा दी गई जानकारी से महासमुंद जिले में विकास कार्यों की धीमी गति और प्रशासनिक उदासीनता उजागर हुई है।

विधायक चातुरी नंद के सवाल पर जल संसाधन मंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार बजट वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में महासमुंद जिले में एनीकट, जलाशय तथा अन्य सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 2910.00 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। किंतु वर्ष 2024-25 के बजट में प्रावधानित 43 कार्यों में से मात्र 02 कार्यों को ही प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है, जबकि 41 कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति अभी भी लंबित है। इसी प्रकार वर्ष 2025-26 के बजट में प्रावधानित 26 कार्यों में से केवल 04 कार्यों को ही प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है तथा शेष 22 कार्यों की स्वीकृति अब तक लंबित है।

विधायक चातुरी नंद ने कहा कि सिंचाई से जुड़े कार्यों की स्वीकृति में इतनी देरी किसानों के हितों के साथ गंभीर अन्याय है। यदि समय पर इन योजनाओं को स्वीकृति और क्रियान्वयन मिल जाए तो क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई की सुविधा प्राप्त हो सकती है।

इसी तरह एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री द्वारा यह भी जानकारी दी गई कि महासमुंद जिले के अंतर्गत बिलानाला जलाशय योजना के डूबान क्षेत्र में ग्राम बुटीपाली, प.ह.नं. 09, तहसील बसना के 16 किसानों की कुल 7.69 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। इसके एवज में किसानों को दिया जाने वाला 1,60,07,706 रुपये का मुआवजा अब तक लंबित है। विधायक चातुरी नंद ने कहा कि अपनी जमीन खोने वाले किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार को तत्काल भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों सहित मेरे स्वयं के द्वारा कई बार उच्चाधिकारियों को मुआवजा राशि देने की मांग की गई है परंतु आज दिनांक तक मुआवजा नहीं मिल पाया है जो कि बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

इसके अतिरिक्त विधायक चातुरी नंद के ही सवाल पर सहकारिता मंत्री के जवाब में यह जानकारी सामने आई कि महासमुंद जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक 182 धान खरीदी केंद्रों में कुल 1,00,01,871.60 क्विंटल धान की खरीदी की गई है। किंतु 10 फरवरी 2026 तक इन केंद्रों से मात्र 42,11,573.10 क्विंटल धान का ही उठाव किया गया है, जबकि 59,84,108.10 क्विंटल धान का उठाव अब भी शेष है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक चातुरी नंद ने कहा कि धान खरीदी पूर्ण हुए एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी केवल लगभग 40 प्रतिशत धान का उठाव होना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महासमुंद ही नहीं बल्कि कवर्धा सहित कई जिलों में धान परिवहन में देरी के कारण बड़ी मात्रा में धान का शॉर्टेज दिखाकर करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि धान परिवहन में देरी, उचित भंडारण व्यवस्था का अभाव और सुरक्षा में लापरवाही के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान को भारी नुकसान हुआ है, जिससे राज्य सरकार को लगभग 8600 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।

विधायक चातुरी नंद ने राज्य सरकार से मांग की है कि सिंचाई योजनाओं की लंबित प्रशासकीय स्वीकृतियां तत्काल जारी की जाएं, बिलानाला जलाशय से प्रभावित किसानों को लंबित मुआवजा शीघ्र दिया जाए तथा धान उठाव और भंडारण व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए ताकि किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

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