
रायपुर। CG DASTAK
शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में रूसा 2.0 (प्रिपरेटरी ग्रांट) के अंतर्गत रायपुर संभाग के विज्ञान विषयों के शोधार्थियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 से 12 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

आयोजन समिति के सदस्य डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम फरवरी माह में आयोजित प्राध्यापकों के सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम की अगली कड़ी है। इससे पहले 23 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण में विज्ञान संकाय के प्राध्यापकों की सक्रिय भागीदारी रही थी। उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए अब शोधार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। इस प्रशिक्षण का विषय “कम्प्यूटर आधारित मटेरियल/नैनोमटेरियल नवाचार” रखा गया है।

शोध और नवाचार के महत्व पर जोर
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. आर. श्रीधर, कुलपति, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर ने कहा कि वर्तमान समय में अनुसंधान और नवाचार किसी भी शैक्षणिक संस्थान के विकास का आधार हैं। उन्होंने शोधार्थियों को सलाह दी कि वे अपने शोध में आधुनिक तकनीकों और अंतःविषयक दृष्टिकोण को शामिल करें और अपने शोध निष्कर्षों को समाजोपयोगी रूप में प्रस्तुत करें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य एवं क्षेत्रीय अपर संचालक डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने की। उन्होंने कहा कि शोध कार्य में नैतिकता, पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण बनाए रखना बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने शोधार्थियों को विषय चयन में प्रासंगिकता और नवीनता को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
रिसर्च एथिक्स पर हुआ तकनीकी सत्र
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित पहले तकनीकी सत्र में डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने “रिसर्च एथिक्स” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोध में नैतिकता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के महत्व को बताते हुए आईपीआर, पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, इंडेक्सिंग और प्लेगरिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक शोध में कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और तकनीकी उपकरणों का सही उपयोग शोध की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। उन्होंने शोधार्थियों से अपील की कि शोध का उद्देश्य केवल प्रकाशन नहीं, बल्कि समाज और विज्ञान के लिए मूल्यवान योगदान होना चाहिए।
आयोजन में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल रामटेके ने किया।
डॉ. लखपति पटेल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी, जबकि डॉ. नीरजा सेन ने आभार प्रदर्शन किया।
आयोजन समिति में डॉ. नियति गुरूद्वान और डॉ. वैशाली शरडे प्रमुख सदस्य रहे। इसके अलावा कार्यक्रम में डॉ. मंजु वर्मा, डॉ. भुवनेश्वरी वर्मा, डॉ. रूपशिखा अग्रवाल और डॉ. अंजली चंद्रवंशी सहित कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रायपुर संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शोधार्थी भाग ले रहे हैं, जिन्हें आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों, नैनोमटेरियल नवाचार और तकनीकी उपकरणों के उपयोग के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन दिया जा रहा है।










