बीजापुर में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ फूटा गुस्सा, 100 से ज्यादा मकान तोड़े जाने पर नेशनल हाईवे जाम

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बीजापुर। CG DASTAK 
एक तरफ सरकार सुशासन के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर गरीब, नक्सल पीड़ित और असहाय परिवारों के आशियानों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। इसी सवाल को लेकर बीजापुर में लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। जिला मुख्यालय के नया बस स्टैंड के पीछे वन भूमि पर बने 100 से अधिक मकानों को जिला प्रशासन ने जेसीबी से ध्वस्त कर दिया, जिसके विरोध में प्रभावित परिवारों ने विधायक विक्रम मंडावी के नेतृत्व में नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया।

नक्सल पीड़ित और DRG कर्मियों के घर भी तोड़े गए

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई करीब एक माह पहले की गई थी। तोड़े गए मकानों में नक्सल पीड़ित परिवारों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस डीआरजी के कुछ जवानों के घर भी शामिल हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से दर्जनों परिवार बेघर हो गए, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है।

बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप

पीड़ित परिवारों का आरोप है कि नगर पालिका या वन विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का पूर्व नोटिस नहीं दिया गया। उनका कहना है कि वे पिछले तीन से चार वर्षों से यहां निवास कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने लंबे समय तक प्रशासन चुप क्यों रहा और अब अचानक बुलडोजर कार्रवाई क्यों की गई।

विधायक विक्रम मंडावी मौके पर पहुंचे

कार्रवाई से नाराज नागरिकों ने विधायक विक्रम मंडावी के नेतृत्व में नेशनल हाईवे जाम कर दिया। विधायक स्वयं मौके पर पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत का प्रयास किया, लेकिन समय पर अधिकारियों के नहीं पहुंचने से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।

बातचीत के बाद खुला जाम

काफी देर बाद नगर पालिका के अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। प्रशासन द्वारा बातचीत और समाधान का भरोसा दिए जाने के बाद चक्काजाम समाप्त कराया गया। फिलहाल प्रशासन और प्रभावित नागरिकों के बीच बातचीत जारी है।

यह पूरा मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता, पुनर्वास नीति और गरीबों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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