रायगढ़ में बाघ की दस्तक! छाल रेंज में पदचिन्ह मिलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल

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रायगढ़, छत्तीसगढ़ – जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल अंतर्गत छाल रेंज में बाघ की मौजूदगी की आशंका से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। हाटी से लेकर पुरूंगा और सामरसिंघा गांव तक कई स्थानों पर बड़े आकार के पैरों के निशान देखे गए हैं। वन विभाग ने इन पदचिन्हों को तेंदुए से बड़ा पाते हुए बाघ के होने की आशंका जताई है और मामले को गंभीरता से लिया है।

वन विभाग की टीम 29 जुलाई से लगातार क्षेत्र में गश्त और ट्रैकिंग कर रही है। पहाड़ी इलाकों और जंगलों में गहन जांच की जा रही है। हालांकि पहले दिन के बाद कोई नया पदचिन्ह नहीं मिला है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ किसी पहाड़ी मार्ग से क्षेत्र से बाहर निकल गया होगा। पहाड़ी इलाकों में पैरों के निशान मिलना अपेक्षाकृत कठिन होता है, जिससे उसकी सटीक लोकेशन पता नहीं चल सकी है।

इस घटना के बाद सामरसिंघा, गेरवानी, किदा, खर्रा, गंजईपाली और गलीमार सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल है। स्थानीय लोग घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। बच्चों और पशुओं को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की जा रही है।

वन विभाग की ओर से मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया गया है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि बाघ या उसके निशानों से संबंधित कोई जानकारी मिले, तो तुरंत नजदीकी वन विभाग कार्यालय या अधिकारियों को सूचित करें।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि “हम लगातार निगरानी रखे हुए हैं। ड्रोन सर्वे, कैमरा ट्रैप और वनकर्मियों की टीम को जंगल में सक्रिय रखा गया है। फिलहाल बाघ के क्षेत्र से बाहर जाने की संभावना है, लेकिन पूरी पुष्टि होने तक निगरानी जारी रहेगी।”

सम्भावित खतरे से निपटने के लिए वन विभाग द्वारा उठाए गए कदम:

  • संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई
  • ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए मुनादी
  • बाघ की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं
  • वनकर्मियों की अतिरिक्त टीमों को तैनात किया गया है

बाघ की मौजूदगी से जहां वन्यजीव प्रेमियों में उत्सुकता है, वहीं ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल भी बना हुआ है। वन विभाग की सक्रियता और ग्रामीणों का सहयोग ही इस स्थिति से निपटने का एकमात्र समाधान है।

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