
बिलासपुर। CG DASTAK
कोटा ब्लॉक के बहेरामुड़ा प्राथमिक स्कूल का मामला, जांच में स्कूल समय में नशे की हालत और अभद्र-अमर्यादित व्यवहार की पुष्टि; शिक्षक ने वीडियो में 10 महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा किया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का कथित तौर पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। मामला कोटा ब्लॉक के बहेरामुड़ा प्राथमिक स्कूल का है। वायरल वीडियो सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने मामले की जांच कराई और स्कूल प्रबंधन समिति को शिक्षक के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जांच रिपोर्ट में स्कूल समय के दौरान शिक्षक के शराब के नशे में स्कूल परिसर में पहुंचने तथा अभद्र एवं अमर्यादित व्यवहार की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
वायरल वीडियो के बाद शुरू हुई जांच
मिली जानकारी के अनुसार, बहेरामुड़ा प्राथमिक स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक सीएस राज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में शिक्षक से स्कूल आने को लेकर सवाल किया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षक ने शराब पीकर स्कूल आने की बात स्वीकार की।
वीडियो में शिक्षक ने यह भी दावा किया कि उसे करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिला है और इसी बात को लेकर वह नाराजगी जता रहा था। हालांकि वेतन लंबित होने की वास्तविक स्थिति और उसका कारण विभागीय स्तर पर जांच का विषय है।
वीडियो में शिक्षक द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में कथित आपत्तिजनक एवं अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का भी उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।
जांच में स्कूल समय में नशे की पुष्टि
वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने मामले की जांच कराई। जांच के आधार पर स्कूल प्रबंधन को शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक 3 अक्टूबर को स्कूल समय में शिक्षक के शराब के नशे में स्कूल परिसर में मौजूद रहने और अभद्र-अमर्यादित व्यवहार करने की पुष्टि हुई।
शिक्षा विभाग ने इसे शिक्षक की गरिमा और शासकीय आचरण के खिलाफ माना है।
तत्काल निलंबन और 24 घंटे में रिपोर्ट
जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और सचिव को शिक्षक सीएस राज को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्रवाई की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है।
आदेश में शिक्षक के व्यवहार को शिक्षक की गरिमा और शासकीय आचरण के विपरीत बताया गया है। साथ ही अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थाओं से जुड़े नियमों और सरकारी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
10 महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा भी जांच के घेरे में
वायरल वीडियो में शिक्षक ने कथित तौर पर कहा कि उसे 10 महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। हालांकि विभागीय कार्रवाई में इस दावे को तत्काल सही मानने के बजाय इसकी भी जांच आवश्यक है कि वेतन कब से लंबित है और भुगतान नहीं होने की वजह क्या है।
यदि वेतन वास्तव में लंबित है, तो उसके लिए जिम्मेदार प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर वेतन संबंधी शिक्षक का दावा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है।
मामले में शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद आगे की रिपोर्ट और विभागीय प्रक्रिया से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।









