
बिलासपुर। CG DASTAK
49 दिनों तक चला अभियान, नुक्कड़ नाटक से लेकर साइबर चौपाल तक हुए कार्यक्रम; 2026 के 8 महीनों में 3,100 मामलों में 12.23 करोड़ रुपये की राशि होल्ड कराने का दावा
बिलासपुर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को जागरूक करने के लिए बिलासपुर पुलिस द्वारा चलाया गया साइबर जागरूकता महाअभियान व्यापक स्तर पर पहुंच बनाने में सफल रहा। 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चले इस अभियान के दौरान जिले में 18 लाख से अधिक लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। अभियान के प्रदर्शन के आधार पर बिलासपुर पुलिस को प्रदेश में दूसरा स्थान मिलने की जानकारी सामने आई है।

अभियान का उद्देश्य सिर्फ लोगों को साइबर अपराधों के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ठगी से बचने के व्यावहारिक तरीके समझाना भी रहा।
49 दिनों तक अलग-अलग वर्गों पर रहा फोकस
साइबर जागरूकता महाअभियान को सात सप्ताह में बांटकर अलग-अलग वर्गों को केंद्र में रखा गया। पहले सप्ताह विद्यार्थियों और युवाओं, दूसरे सप्ताह बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थाओं, तीसरे सप्ताह वरिष्ठ नागरिकों, चौथे सप्ताह महिलाओं एवं छात्राओं, पांचवें सप्ताह असंगठित क्षेत्र के युवाओं और श्रमिकों, छठे सप्ताह शासकीय संस्थाओं तथा सातवें सप्ताह ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्र के लोगों को जागरूक किया गया।

इस दौरान पुलिस ने ऑनलाइन ठगी, UPI फ्रॉड, QR कोड फ्रॉड, फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, OTP फ्रॉड, KYC ठगी, बैंक और कार्ड फ्रॉड, SIM स्वैप, पहचान की चोरी, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, फर्जी प्रोफाइल, साइबर बुलिंग, सेक्सटॉर्शन, मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो और डीपफेक जैसे साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी।
नुक्कड़ नाटक से साइबर जुंबा तक
जागरूकता अभियान को लोगों तक पहुंचाने के लिए पुलिस ने पारंपरिक तरीकों के साथ नए माध्यमों का भी इस्तेमाल किया। नुक्कड़ नाटक, साइबर प्रश्नोत्तरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हॉकी और एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं, स्केटिंग, ताइक्वांडो और कराटे जैसी गतिविधियों को अभियान से जोड़ा गया।

इसके अलावा गणेश पंडालों में पहुंचकर श्रद्धालुओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। ग्रामीण इलाकों में साइबर ग्राम चौपाल आयोजित की गई।
साइबर जुंबा के जरिए फिटनेस गतिविधियों के बीच भी लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने का संदेश दिया गया। रक्षाबंधन पर ‘साइबर जागृति रक्षा सूत्र’ बांधकर जागरूकता का संदेश दिया गया।
बच्चों ने कथक और नाटक से दिया संदेश
अभियान के समापन कार्यक्रम में बच्चों ने साइबर जागरूकता को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए लोगों तक पहुंचाया। फियोना खान ने कथक के जरिए प्रस्तुति दी, जबकि डी फॉर डांस एकेडमी के बच्चों ने हास्य-व्यंग्य से भरपूर नाट्य-नृत्य प्रस्तुत किया।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से साइबर फ्रॉड के अलग-अलग तरीकों और उनसे बचने के उपायों को मनोरंजक तरीके से समझाया गया।
2026 में 3,100 मामलों में 12.23 करोड़ रुपये होल्ड
अभियान के दौरान पुलिस ने साइबर ठगी की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के महत्व पर भी जोर दिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2026 के शुरुआती 8 महीनों में 3,100 साइबर ठगी के मामलों में कुल 12.23 करोड़ रुपये की राशि होल्ड कराने का दावा किया गया है।
पुलिस के अनुसार लोगों की जागरूकता और समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने में मदद मिल सकती है। साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में पीड़ितों को जल्द से जल्द 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करने की सलाह दी जाती है।
लॉटरी से डीपफेक तक बदला साइबर फ्रॉड का ट्रेंड
अभियान में साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को भी समझाया गया। पुलिस की प्रस्तुति के अनुसार शुरुआती दौर में जहां वेबसाइट डिफेसमेंट, ईमेल लॉटरी, नाइजीरियन स्कैम और वायरस जैसे मामले सामने आते थे, वहीं बाद के वर्षों में कार्ड क्लोनिंग, सोशल मीडिया फ्रॉड और फिशिंग जैसे तरीके बढ़े।
इसके बाद UPI फ्रॉड, QR कोड स्कैम, फेक कस्टमर केयर और OTP फ्रॉड सामने आए। हाल के वर्षों में वर्क फ्रॉम होम फ्रॉड, इंस्टेंट लोन ऐप, सेक्सटॉर्शन, डिजिटल अरेस्ट, क्रिप्टो स्कैम और AI डीपफेक जैसे नए तरीके भी साइबर अपराध की चुनौती बने हैं।
कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों ने की अभियान की सराहना
समापन अवसर पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि आज इंटरनेट और मोबाइल से लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में जुड़ा है। ऐसे में साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोगों को केवल अपराध के बारे में जानकारी देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें ठगी से बचने के तरीके भी समझाना जरूरी है।
एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य जिले के हर वर्ग को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना था। पुलिस ने नागरिकों, सामाजिक संगठनों, मीडिया, शिक्षण संस्थानों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से अभियान को आगे बढ़ाया।
अभियान के दौरान महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों का उल्लेख करते हुए लोगों को सकारात्मक व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।









