
सरायपाली। खाद की कालाबाजारी और मनमानी कीमत पर बिक्री रोकने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई किए जाने के बावजूद सरायपाली विकासखंड में किसानों से यूरिया, डीएपी, फर्टिलाइजर और कीटनाशक जैसी कृषि सामग्री के लिए निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। खेती के महत्वपूर्ण सीजन में खाद की जरूरत को देखते हुए किसान कथित तौर पर मजबूरी में अधिक कीमत चुकाने को विवश हैं।
किसानों का आरोप है कि क्षेत्र की कुछ खाद दुकानों में निर्धारित दर के बजाय मनमानी कीमत पर कृषि सामग्री बेची जा रही है। इससे किसानों की उत्पादन लागत बढ़ रही है और उनमें शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।
पूर्व कार्रवाई के बाद भी नहीं बदली स्थिति
खाद के वितरण और बिक्री में अनियमितताओं को लेकर पूर्व में कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद ओवररेट की शिकायतें सामने आना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
सवाल यह है कि पूर्व कार्रवाई के बाद खाद दुकानों के स्टॉक, खरीद-बिक्री रजिस्टर और बिक्री दर की नियमित जांच कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है?
‘खाद से माल बनाने’ के खेल पर कब लगेगा अंकुश?
किसानों का कहना है कि खाद की वास्तविक कीमत और दुकानों पर कथित रूप से वसूली जा रही कीमत के बीच अंतर की शिकायतों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय स्टॉक रजिस्टर, बिल, खरीद रिकॉर्ड और बिक्री दर का मिलान किया जाए, ताकि अनियमितता की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
किसानों को राहत या सिर्फ कार्रवाई का दिखावा?
कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर खाद दुकानों की जांच और कार्रवाई किए जाने के बावजूद यदि किसानों को निर्धारित दर पर कृषि सामग्री उपलब्ध नहीं हो रही है, तो कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
किसानों की मांग है कि प्रशासन सरायपाली सहित जिलेभर में खाद दुकानों का औचक निरीक्षण कराए और निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही दुकानों पर निर्धारित बिक्री दर और उपलब्ध स्टॉक की स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित कराई जाए।
अब देखना होगा कि किसानों की शिकायतों पर प्रशासन कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और खाद की कथित कालाबाजारी व ओवररेट पर वास्तविक अंकुश कब लगता है।









