तनाव कौशल को नष्ट कर रहा है”: प्रो. झा ने बताए भावनात्मक कल्याण और तनाव प्रबंधन के उपाय

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रायपुर। CG DASTAK 

रायपुर। “प्रशासनिक दक्षता, सुशासन एवं संस्थागत उत्कृष्टता” विषय पर आयोजित एक-सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के पांचवें दिन “भावनात्मक कल्याण एवं तनाव प्रबंधन” विषय पर डॉ. मीता झा ने प्रतिभागियों को तनाव के प्रभाव और उससे प्रभावी तरीके से निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।

व्याख्यान में तनाव को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बताते हुए इसके भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक, संज्ञानात्मक और कार्यक्षमता पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई। डॉ. झा ने बताया कि लगातार तनाव व्यक्ति की कार्यक्षमता और कौशल को प्रभावित कर सकता है, इसलिए समय रहते इसके संकेतों को समझना और उसका प्रबंधन करना जरूरी है।

तनाव के अलग-अलग आयामों पर चर्चा

सत्र में मनोवैज्ञानिक, संज्ञानात्मक, संस्थागत, कार्यभार, सतर्कता और प्रणालीगत बदलाव से जुड़े तनाव के विभिन्न पहलुओं को समझाया गया। साथ ही समग्र विकास के आठ आयामों—भावनात्मक, शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, पर्यावरणीय, वित्तीय, आध्यात्मिक और व्यक्तिगत विकास—पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

 

डॉ. झा ने भावनात्मक प्रतिक्रिया के पांच चरणों ट्रिगर, व्याख्या, अनुभूति, कार्य करने की इच्छा और संचार को उदाहरणों के साथ समझाया। उन्होंने एकमैन द्वारा बताए गए छह मूलभूत भावों—खुशी, दुख, भय, क्रोध, आश्चर्य और घृणा—के साथ नाट्यशास्त्र में वर्णित भाव एवं रस की अवधारणा की भी जानकारी दी।

शिक्षकों के भावनात्मक श्रम को भी समझाया

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में Emotional Labour पर चर्चा करते हुए Surface Acting और Deep Acting की अवधारणाओं को स्पष्ट किया गया। वक्ता ने बताया कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ काम करते समय कई तरह की भावनात्मक जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ता है।

विद्यार्थियों में तनाव और भावनात्मक समस्याओं की पहचान के लिए Recognize–Respond–Refer दृष्टिकोण बताया गया। इसके तहत तनाव के संकेतों को पहचानना, संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया देना और आवश्यकता पड़ने पर उचित पेशेवर सहायता के लिए संबंधित व्यक्ति को रेफर करना शामिल है।

श्वास अभ्यास से योग तक, बताए तनाव कम करने के तरीके

सत्र में तनाव प्रबंधन के कई व्यावहारिक उपाय बताए गए। इनमें श्वास अभ्यास, व्यायाम, Progressive Muscle Relaxation, Guided Imagery, ध्यान, योग एवं प्राणायाम, Box Breathing और पर्याप्त नींद आधारित विश्राम तकनीकें शामिल रहीं।

प्राचार्य डॉ. अंजलि भटनागर ने कहा कि तनाव का प्रभाव केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संस्थान के कार्य वातावरण और कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। उन्होंने कर्मचारियों के तनाव को कम करने और मानसिक शांति के लिए ध्यान जैसी गतिविधियों के महत्व पर जोर दिया।

100 से अधिक प्रतिभागी ले रहे प्रशिक्षण

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मंजू वर्मा ने कहा कि पिछले पांच दिनों में आयोजित सभी सत्र प्रतिभागियों के लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहे हैं तथा कार्यक्रम के विभिन्न विषय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

कार्यक्रम में डॉ. नियति गुरुद्वान ने आभार प्रदर्शन किया। आयोजन सचिव श्री लखपति पटेल ने कार्यक्रम के संचालन और व्यवस्थाओं में समन्वय किया, जबकि सह-समन्वयक डॉ. अनिल रामटेके ने आयोजन में सहयोग दिया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालयों के शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने भाग लिया। 100 से अधिक प्रतिभागी इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शामिल हो रहे हैं।

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