
भिलाई। CG DASTAK
भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित हाइटेक औद्योगिक क्षेत्र के सिस्कोल प्लांट में एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया। क्रेन से लोहे की भारी प्लेट गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई। मृतक की पहचान धमधा निवासी राजेश निर्मलकर (40) के रूप में हुई है। राजेश भिलाई से सिस्कोल प्लांट में काम करने के लिए आता था।
हादसे के बाद प्लांट में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब राजेश प्लांट में क्रेन ऑपरेट कर रहा था।
क्रेन से फिसली लोहे की प्लेट, सीधे मजदूर के ऊपर गिरी
जानकारी के अनुसार, प्लांट में क्रेन की मदद से लोहे की प्लेट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान अचानक क्रेन का संतुलन बिगड़ गया और लोहे की भारी प्लेट क्रेन से फिसलकर नीचे जा गिरी।
बताया जा रहा है कि प्लेट सीधे राजेश के ऊपर जा गिरी। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों और मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस को घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। हादसे से जुड़े तथ्यों और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।
7 महीने पहले भी हुई थी ऐसी ही मौत
इस हादसे ने प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक, करीब सात महीने पहले भी सिस्कोल प्लांट में इसी तरह का हादसा हुआ था।
उस घटना में लोहे की प्लेट गिरने से लेखराम कौशल (35) की मौत हो गई थी। बताया गया था कि लेखराम भी क्रेन ऑपरेटर था। काम के दौरान क्रेन से लोहे की प्लेट फिसलकर उसके ऊपर जा गिरी थी।
एक ही प्लांट में कुछ ही महीनों के अंतराल पर दो मजदूरों की इसी तरह मौत होने से अब सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं।
पहले हादसे के बाद भी उठे थे सुरक्षा पर सवाल
करीब सात महीने पहले हुए हादसे के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। उस समय सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही या तकनीकी खामी की आशंका भी जताई गई थी। पुलिस ने प्लांट के कर्मचारियों से पूछताछ कर हादसे के कारणों का पता लगाने की बात कही थी।
अब एक बार फिर उसी तरह का हादसा सामने आने के बाद मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मजदूरों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हादसे के बाद मजदूरों का कहना है कि केवल घटना के बाद जांच करना पर्याप्त नहीं है। काम के दौरान मजदूरों की सुरक्षा कंपनी की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि क्रेन, लोहे की प्लेट और अन्य भारी उपकरणों की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
मजदूरों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कुछ महीने पहले इसी तरह की घटना हो चुकी थी, तो उसके बाद सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए और क्या उन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की गई।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी हादसे की असली वजह
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि लोहे की प्लेट क्रेन से आखिर किस वजह से गिरी। इसके अलावा क्रेन की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा उपकरणों और हादसे के समय अपनाई जा रही सुरक्षा प्रक्रिया की भी जांच की जा सकती है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी, सुरक्षा में लापरवाही या किसी अन्य वजह से हुआ।
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सात महीने के भीतर एक ही तरह की दूसरी घटना के बाद क्या प्लांट प्रबंधन सुरक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव करेगा?









