
रायपुर। CG DASTAK
रायपुर। शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में “प्रशासनिक दक्षता, सुशासन एवं संस्थागत उत्कृष्टता” विषय पर आयोजित एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तीसरे दिन “साइबर फ्रॉड: जागरूकता एवं रोकथाम की रणनीतियां” विषय पर महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को आधुनिक प्रशासनिक चुनौतियों और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना रहा।

सत्र की शुरुआत डॉ. ममता पटेल द्वारा रिसोर्स पर्सन डॉ. नरेश पटेल, सहायक पुलिस आयुक्त, अपराध एवं साइबर सेल, पुलिस कमिश्नरेट रायपुर के परिचय से हुई। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक आज व्यक्तिगत, व्यावसायिक और संस्थागत जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
फिशिंग से लेकर फर्जी एप तक, बताए साइबर फ्रॉड के तरीके
अपने व्याख्यान में डॉ. नरेश पटेल ने साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों और अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फिशिंग, फर्जी लिंक और वेबसाइट, OTP फ्रॉड, पहचान की चोरी, सोशल मीडिया फ्रॉड, फर्जी मोबाइल एप्लीकेशन और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी धोखाधड़ी के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, पासवर्ड, PIN, बैंक खाते की जानकारी या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अविश्वसनीय स्रोतों से मोबाइल एप डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी गई।
मजबूत पासवर्ड और समय पर अपडेट जरूरी
साइबर सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करने, जरूरी सुरक्षा सुविधाओं को सक्रिय रखने और मोबाइल फोन एवं एप्लीकेशन को नियमित रूप से अपडेट करने पर भी जोर दिया गया।
डॉ. पटेल ने कहा कि साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में समय पर रिपोर्टिंग बेहद महत्वपूर्ण है। किसी संदिग्ध या धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन की जानकारी तत्काल संबंधित साइबर अपराध रिपोर्टिंग तंत्र और वित्तीय संस्था को देने से नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल साक्षरता बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों के साथ विद्यार्थियों के बीच भी डिजिटल साक्षरता और साइबर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई। प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल लेन-देन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक सवाल पूछे, जिनका रिसोर्स पर्सन ने जवाब दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजलि भटनागर ने कहा कि “साइबर फ्रॉड की रोकथाम के लिए जागरूकता ही सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।” उन्होंने प्रतिभागियों से सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने और समाज में भी साइबर अपराधों से बचाव को लेकर जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. मंजू वर्मा ने फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तीन दिनों में आयोजित सत्र प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रासंगिक रहे हैं। डॉ. नियति गुरुद्वान ने आभार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के आयोजन सचिव श्री लखपति पटेल ने व्यवस्थाओं एवं समन्वय की जिम्मेदारी संभाली, जबकि सह-समन्वयक डॉ. अनिल रामटेके ने विभिन्न सत्रों के संचालन में सहयोग किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालयों के शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।









