राजनांदगांव में AI और शिक्षा पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने मानवीय मूल्यों को बताया जरूरी

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राजनांदगांव, 03 नवंबर 2026। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षा के भविष्य और मानवीय मूल्यों की भूमिका पर चर्चा के लिए संस्कार सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, राजनांदगांव में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्कार सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन और अपोलो कॉलेज, अंजोरा, दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय “Education in the AI Era: Rethinking Teaching, Learning and Human Values” रहा।

संगोष्ठी में शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं, चुनौतियों और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में इसके प्रभावी उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आधुनिक तकनीक शिक्षा को अधिक प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बना सकती है, लेकिन इसके साथ नैतिकता, शैक्षणिक ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना भी जरूरी है।

अतिथियों की उपस्थिति में हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कार सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन की प्राचार्य डॉ. गुरप्रीत कौर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अपोलो कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. राखी शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कार सिटी इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य श्रीमती रेखा तिवारी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और राजकीय गीत के साथ हुआ। इसके बाद अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। श्रीमती पूजा श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए संगोष्ठी के उद्देश्य और वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में AI की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षण को सरल, रचनात्मक, प्रभावी और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने शिक्षा में AI की संभावनाओं पर रखे विचार

संगोष्ठी में प्रमुख वक्ताओं के रूप में PowerVolt Group के Executive Vice President श्री अभिजात मिश्रा, Veetraga Research Foundation रायपुर की Chairperson डॉ. दिव्या शर्मा, Columbia Professional University रायपुर की Faculty of Education की डीन डॉ. आभा दुबे, इसी विश्वविद्यालय के Director IQAC डॉ. अरुण कुमार दुबे तथा Kalinga University रायपुर की Faculty of Education की प्रो. डॉ. लुभावनी त्रिपाठी ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

वक्ताओं ने शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, शोध की नई संभावनाओं, डिजिटल शिक्षण सामग्री के निर्माण तथा विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मकता विकसित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

इसके साथ ही AI के उपयोग से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान आकर्षित किया गया। विशेषज्ञों ने शैक्षणिक ईमानदारी, नैतिकता, डेटा गोपनीयता और मानवीय मूल्यों के संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया। चर्चा में यह विचार उभरकर सामने आया कि तकनीक का इस्तेमाल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि विद्यार्थियों की मौलिक सोच और मानवीय क्षमताओं को कमजोर करने के लिए।

AI शिक्षकों की भूमिका को समाप्त नहीं करता: डॉ. गुरप्रीत कौर

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्राचार्य डॉ. गुरप्रीत कौर ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और विवेक का विकास करना भी है।

उन्होंने कहा कि AI शिक्षकों की भूमिका को समाप्त नहीं करता, बल्कि उनकी शिक्षण क्षमता को और अधिक सशक्त बनाने में मदद करता है। इसलिए शिक्षकों को तकनीक के बदलते स्वरूप को समझते हुए उसका सकारात्मक उपयोग करना चाहिए।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में मददगार हो सकता है AI: डॉ. राखी शर्मा

मुख्य अतिथि डॉ. राखी शर्मा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से शिक्षा में नवाचार और गुणवत्तापूर्ण अधिगम को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों और शोधार्थियों से आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक रहने तथा उनका जिम्मेदारी के साथ सकारात्मक उपयोग करने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि श्रीमती रेखा तिवारी ने शिक्षा में हो रहे तकनीकी बदलावों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य की शिक्षा में तकनीकी दक्षता और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक होगा।

शोधार्थियों और प्रतिभागियों ने भी साझा किए अनुभव

संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों और शोधार्थियों ने विषय से जुड़े अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। AI के शैक्षणिक उपयोग, शोध पद्धति, नवाचार और भविष्य की शिक्षा को लेकर सार्थक पैनल चर्चा हुई। कार्यक्रम ने शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को शिक्षा में नई तकनीकों की भूमिका को समझने का अवसर प्रदान किया।

समापन समारोह में अतिथियों और वक्ताओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। सुश्री किरण सोनटिया ने आभार प्रदर्शन करते हुए प्राचार्य डॉ. गुरप्रीत कौर, मुख्य अतिथि डॉ. राखी शर्मा, विशिष्ट अतिथि श्रीमती रेखा तिवारी, सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों, शोधार्थियों, छात्र-छात्राओं और आयोजन में सहयोग देने वाले सदस्यों के प्रति आभार जताया।

यह संगोष्ठी शिक्षा में आधुनिक तकनीक और मानवीय मूल्यों के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को AI के सार्थक और जिम्मेदार उपयोग के प्रति प्रेरित करने के साथ भविष्य की शिक्षा को लेकर नए दृष्टिकोण साझा किए गए।

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