बिलासपुर में 25 हजार रुपये की रिश्वत के आरोप में पटवारी निलंबित, कलेक्टर ने दिए 7 दिन में आरोप पत्र तैयार करने के निर्देश

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बिलासपुर। CG DASTAK 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में 25 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के संबंध में तहसीलदार पचपेड़ी की ओर से प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर की है। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने के बाद पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया।

वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई

मामला शासकीय राजस्व कार्य के लिए कथित तौर पर 25 हजार रुपये की रिश्वत लेने से जुड़ा है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो के आधार पर मामले की जांच कराई गई।

तहसीलदार पचपेड़ी ने 28 अक्टूबर को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की।

प्रशासनिक आदेश में पटवारी के कृत्य को सिविल सेवा आचरण नियमों के विपरीत और गंभीर कदाचरण की श्रेणी में माना गया है। आदेश के अनुसार, इस मामले से शासन की छवि धूमिल होने की बात भी कही गई है।

पहले हल्का नंबर 14 में थे पदस्थ

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी पहले पटवारी हल्का नंबर 14 में पदस्थ थे। वर्तमान में वे तहसील पचपेड़ी के पटवारी हल्का नंबर 05 में कार्यरत थे।

जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई राजस्व विभाग के कामकाज और शासकीय कर्मचारियों के आचरण से जुड़े नियमों के तहत की गई है।

निलंबन अवधि में कोटा कार्यालय होगा मुख्यालय

निलंबन अवधि के दौरान पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी का मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कोटा के कार्यालय में निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

निलंबन के दौरान संबंधित कर्मचारी को निर्धारित मुख्यालय में रहकर लागू नियमों और निर्देशों का पालन करना होगा।

सात दिनों के भीतर आरोप पत्र तैयार करने के निर्देश

कलेक्टर ने तहसीलदार पचपेड़ी को संबंधित पटवारी के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर सात दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इससे मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया बढ़ेगी।

आरोप पत्र तैयार होने के बाद नियमानुसार विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। मामले में अंतिम विभागीय निष्कर्ष और अन्य कार्रवाई संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

राजस्व विभाग में जवाबदेही पर जोर

सरकारी राजस्व कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। रिश्वतखोरी से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई से सरकारी व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार पटवारी को निलंबित कर दिया गया है और उनके विरुद्ध आरोप पत्र तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

महत्वपूर्ण: फिलहाल कार्रवाई विभागीय जांच और प्रथम दृष्टया आरोपों के आधार पर हुई है। इसलिए मामले को रिश्वत लेने के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए; अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगा।

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