
रायपुर। CG DASTAK
रायपुर। पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल बड़े-बड़े संकल्प लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाना जरूरी है। पानी और बिजली की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल जैसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह विचार शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास ने राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों के लिए आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए।

महाविद्यालय में ‘पर्यावरण संरक्षण एवं हमारी भूमिका’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में डॉ. व्यास ने पर्यावरण के महत्व, वर्तमान समय में उसके सामने मौजूद चुनौतियों और संरक्षण के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता तभी सार्थक होगी, जब वह हमारी आदतों और रोजमर्रा के व्यवहार में दिखाई देगी।
पानी बचाने से लेकर बिजली की खपत कम करने तक दिए सुझाव
डॉ. गोवर्धन व्यास ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए सरल और व्यावहारिक उपाय अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने पॉलीथिन की जगह कपड़े के थैलों का उपयोग करने, हाथ धोते समय नल खुला नहीं छोड़ने और डिस्पोजेबल कप के स्थान पर अपने गिलास का इस्तेमाल करने जैसे सुझाव दिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कमरे से बाहर निकलते समय लाइट और पंखे बंद करने तथा कम दूरी के लिए वाहन की जगह पैदल चलने की आदत विकसित करनी चाहिए।
डॉ. व्यास के अनुसार, ये प्रयास भले ही छोटे दिखाई दें, लेकिन जब बड़ी संख्या में लोग इन्हें नियमित रूप से अपनाते हैं, तो इनका सामूहिक प्रभाव व्यापक हो सकता है। पर्यावरण संरक्षण केवल पौधारोपण या विशेष अवसरों पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसे पूरे वर्ष अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है।
युवाओं की भागीदारी से आएगा सकारात्मक बदलाव
डॉ. व्यास ने कहा कि पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान तभी संभव है, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे। सरकार और सामाजिक संस्थाओं के प्रयासों के साथ आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से स्वयं बदलाव की शुरुआत करने और अपने व्यवहार से दूसरों को प्रेरित करने का आह्वान किया।
प्राचार्य अंजलि भटनागर ने भी दिया जागरूकता पर जोर
महाविद्यालय की प्राचार्य अंजलि भटनागर ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. निशा शर्मा ने कहा कि NSS स्वयंसेवक पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के साथ प्रकृति के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध भी कराते हैं।
इस अवसर पर श्री मोहन प्रताप सिंह ने भी पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया।
प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। डॉ. गोवर्धन व्यास ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया और पर्यावरणीय समस्याओं के प्रभाव तथा उनके समाधान के उपायों को समझाया।
कार्यक्रम के अंत में NSS कार्यक्रम अधिकारी डॉ. निशा शर्मा ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने आमंत्रित वक्ता डॉ. गोवर्धन व्यास सहित कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों और उपस्थितजनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी शुरुआत अपने दैनिक व्यवहार में छोटे-छोटे बदलाव अपनाने से की जा सकती है।
CG Dastak — हर खबर, सीधा सच!
🌐 वेबसाइट: https://www.cgdastak.com









