
रायपुर। CG DASTAK
रायपुर। दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर हजारों लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसी खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।
नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नामक राक्षस ने देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान कर रखा था। उसने हजारों कन्याओं को बंदी बना लिया था। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर सभी को मुक्त कराया। इसी विजय की स्मृति में इस दिन दीप जलाने की परंपरा है।
रूप चौदस के दिन क्यों होता है अभ्यंग स्नान?
नरक चतुर्दशी पर सुबह सूर्योदय से पहले उठकर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन तिल के तेल से शरीर पर मालिश कर स्नान करने से नकारात्मकता दूर होती है और सौंदर्य एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है।
इसी कारण इसे रूप चौदस भी कहा जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं इस दिन विशेष रूप से श्रृंगार भी करती है।
नरक चतुर्दशी पर क्या करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
- यमराज के निमित्त दीपदान करें।
- जरूरतमंदों को दान दें।
- घर की साफ-सफाई और सजावट करें।
छोटी दिवाली पर दीपदान का महत्व
इस दिन शाम को घर के बाहर दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
नरक चतुर्दशी का संदेश
नरक चतुर्दशी हमें बुराई पर अच्छाई की जीत, अंधकार पर प्रकाश और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का संदेश देती है। यह पर्व जीवन में स्वच्छता, पवित्रता और नई ऊर्जा का संचार करने की प्रेरणा देता है।









