धरमजयगढ़ में 33 केवी लाइन विस्तार मामला हाईकोर्ट पहुंचा: केंद्र, राज्य सरकार और बिजली कंपनी को नोटिस, 13 जुलाई को अगली सुनवाई

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बिलासपुर। CG DASTAK 

रायगढ़ जिले के हाथी प्रभावित धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में 33 केवी विद्युत लाइन विस्तार को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित बिजली कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी।

राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय

सुनवाई के दौरान राज्य और केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किया। वहीं, निजी कंपनी को नियमानुसार नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया, जिस पर हाईकोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत प्रदान की। साथ ही, जवाब मिलने के बाद याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति दी गई।

वन स्वीकृति के बिना कार्य किए जाने का आरोप

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना वन एवं राजस्व भूमि पर गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गईं। साथ ही, 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार में भी निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया।

11 केवी लाइन के खंभों के उपयोग का आरोप

याचिका के अनुसार, भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण के दौरान लगाए गए सीएसपीडीसीएल के पोलों का उपयोग निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लिए भी किया गया। आरोप है कि ऐसा अलग से वन भूमि डायवर्सन और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों से बचने के उद्देश्य से किया गया।

अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का दावा

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 11 केवी लाइन नवीनीकरण के नाम पर ऐसा ढांचा तैयार किया गया, जिससे निजी जल विद्युत परियोजना को लाभ मिला। इससे सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

पहले भी दायर हुई थी याचिका

याचिकाकर्ता विवेक कुमार पांडेय ने इससे पहले भी इसी मामले में याचिका दायर की थी। हालांकि, सुरक्षा राशि जमा करने से छूट संबंधी आवेदन खारिज होने के बाद 7 मई 2026 को वह याचिका निरस्त कर दी गई थी। बाद में नियमों के अनुसार सुरक्षा राशि जमा कर नई जनहित याचिका दायर की गई, जिस पर अब हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।

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