
सरायपाली। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र की केना सेवा सहकारी समिति में करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपये के कथित KCC ऋण फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में मृत किसानों के नाम पर ऋण जारी करने, समिति क्षेत्र से बाहर के किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत करने और जमीन के रकबे में कथित हेरफेर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपेक्षा व्यास ने 6 अगस्त 2026 को महासमुंद के नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा को संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, निर्देश के 19 दिन बाद भी अपराध दर्ज नहीं होने से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
1 से 3 एकड़ जमीन, दस्तावेजों में 19 से 25 एकड़
जांच रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान कुछ किसानों की जमीन के वास्तविक रकबे में कथित हेरफेर कर उसे रिकॉर्ड में कई गुना अधिक दर्शाया गया।
जानकारी के मुताबिक, जिन किसानों के पास वास्तविक रूप से एक से तीन एकड़ तक जमीन थी, उनके नाम पर दस्तावेजों में 19 से 25 एकड़ तक का रकबा दिखाकर लाखों रुपये का KCC ऋण स्वीकृत किए जाने का मामला सामने आया है।
कुछ किसानों को कथित ऋण की जानकारी तब हुई, जब वे स्वयं बैंक से ऋण लेने पहुंचे। जांच के दौरान कई किसानों ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने संबंधित ऋण के लिए आवेदन ही नहीं किया था।
मृत किसानों के नाम पर भी ऋण का आरोप
मामले का सबसे गंभीर पहलू मृत किसानों के नाम पर ऋण जारी किए जाने से जुड़ा है। जांच में ऐसे मामलों का उल्लेख सामने आया है।
अब सवाल यह है कि मृत किसानों के नाम पर ऋण आवेदन, स्वीकृति और राशि निकासी की प्रक्रिया आखिर कैसे पूरी हुई। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में ऋण से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृति प्रक्रिया, राशि निकासी और संबंधित रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
जांच में छह लोगों की भूमिका का उल्लेख
जांच प्रतिवेदन में छह लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। इनमें केना समिति के तत्कालीन प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा बैंक के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुंदर पटेल, वर्तमान सुपरवाइजर राज कुमार प्रधान, बैंक मैनेजर युवराज नायक, कनिष्ठ लिपिक हीरा सिंह ध्रुव और प्रभारी लेखापाल खिलेश्वर साहू के नाम शामिल हैं।
बैंक स्तर पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई किए जाने की जानकारी है। वहीं समिति स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है।
6 अगस्त को FIR के निर्देश, फिर भी कार्रवाई लंबित

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर की CEO अपेक्षा व्यास ने 6 अगस्त को जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कराने और उसकी छायाप्रति मुख्य कार्यालय भेजने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद 19 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं होने से यह सवाल उठ रहा है कि लिखित आदेश के पालन में देरी आखिर किस स्तर पर हो रही है।
विभागीय कार्रवाई बनाम आपराधिक जांच
करीब 1.77 करोड़ रुपये के कथित KCC ऋण फर्जीवाड़े में विभागीय कार्रवाई के साथ आपराधिक जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
FIR के बाद पुलिस यह जांच कर सकती है कि ऋण स्वीकृति में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ, जमीन के रकबे में कथित बदलाव कैसे किया गया, मृत किसानों के नाम पर ऋण किस प्रक्रिया के तहत जारी हुआ, राशि किस माध्यम से निकाली गई और इस पूरी प्रक्रिया में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
पहले भी सामने आ चुका है करोड़ों के KCC ऋण का मामला
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि केना समिति में इससे पहले किसानों के रकबे में कथित हेरफेर कर तीन करोड़ रुपये से अधिक के KCC ऋण से जुड़ा मामला सामने आ चुका है।
ऐसे में मौजूदा मामले में FIR में हो रही देरी ने सहकारी बैंक और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि 6 अगस्त को जारी लिखित निर्देश के बावजूद लंबित FIR पर जिम्मेदार अधिकारी कब तक कार्रवाई करते हैं और करीब 1.77 करोड़ रुपये के कथित KCC ऋण फर्जीवाड़े की आपराधिक जांच आखिर कब शुरू होती है।









