
नई दिल्ली। CG DASTAK
नई दिल्ली। नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए EPF और EPS से जुड़ा बड़ा बदलाव जल्द देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज के लिए मौजूदा ₹15,000 प्रति माह की वेतन सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव पर 16 सितंबर 2026 को केंद्रीय कैबिनेट में विचार होने की संभावना है।

मौजूदा व्यवस्था में ₹15,000 तक की निर्धारित वेतन सीमा वाले कर्मचारियों के लिए EPF/EPS कवरेज अनिवार्य है। ₹15,000 से अधिक वेतन पाने वाले नए कर्मचारियों के लिए मौजूदा नियमों के तहत EPF में अनिवार्य सदस्यता का प्रावधान अलग तरह से लागू होता है।
₹25 हजार की सीमा होने पर क्या बदलेगा?
अगर सरकार प्रस्ताव को मंजूरी देती है और बाद में इसे अधिसूचित करती है, तो ₹15,000 से ₹25,000 तक की निर्धारित वेतन सीमा वाले अधिक कर्मचारी अनिवार्य EPF/EPS कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।

इसका उद्देश्य संगठित क्षेत्र में काम करने वाले ज्यादा कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने ₹25,000 की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट की मंजूरी और आगे की औपचारिक प्रक्रिया जरूरी थी।
क्या PF कटौती भी ₹3,000 हो जाएगी?
यह बात अभी निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती।i
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यदि केवल mandatory coverage ceiling को ₹25,000 किया जाता है, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि हर कर्मचारी और नियोक्ता पर ₹25,000 की पूरी राशि पर अनिवार्य योगदान लागू हो जाए। मौजूदा प्रस्ताव में contribution calculation को लेकर अलग व्यवस्था संभव बताई गई है।

इसलिए वायरल खबरों में दिए जा रहे “अब हर कर्मचारी की ₹3,000 PF कटौती होगी” जैसे दावों को फिलहाल अंतिम नियम मानना सही नहीं होगा।
कर्मचारियों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि ₹25,000 की नई सीमा लागू होती है, तो ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक की निर्धारित वेतन सीमा वाले कई कर्मचारी EPF/EPS के अनिवार्य दायरे में आ सकते हैं।









