
अंबिकापुर के एसईसीएल अमेरा खदान के विस्तारीकरण को लेकर लखनपुर ब्लॉक के ग्रामवासियों और पुलिस के बीच बुधवार को जोरदार झड़प हो गई, जिसमें दोनों पक्षों के लोग घायल हुए और पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया।

ग्रामीण लंबे समय से जमीन, पर्यावरण और आजीविका पर खतरे का हवाला देकर खदान विस्तार का विरोध कर रहे हैं, जबकि एसईसीएल प्रबंधन सरकारी भूमि पर विस्तार कार्य आगे बढ़ाना चाहता है।

क्या हुआ विवादबुधवार को अमेरा ओपनकास्ट खदान के खुले क्षेत्र के विस्तारीकरण के लिए भारी मशीनरी और पुलिस बल के साथ एसईसीएल टीम मौके पर पहुंची, जहां पहले से बड़ी संख्या में ग्रामीण विरोध के लिए एकत्र थे।

बातचीत के दौरान माहौल गरमाता गया और देखते ही देखते धक्का-मुक्की, मारपीट और दोनों ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे कई ग्रामीण और पुलिसकर्मी चोटिल हुए, हालांकि प्रशासन ने किसी गंभीर चोट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ग्रामीणों की आपत्तियांग्रामवासियों का आरोप है कि खदान के विस्तारीकरण से उनकी कृषि भूमि अधिग्रहित होगी, जल स्रोतों पर असर पड़ेगा और पारंपरिक आजीविका पर सीधा खतरा उत्पन्न होगा, इसलिए वे किसी भी कीमत पर जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि खदान में पहले से हो रहे खनन से धूल, प्रदूषण और विस्फोटों का असर गांव पर पड़ रहा है, ऐसे में एक्सटेंशन प्रोजेक्ट से स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी जोखिम और बढ़ जाएंगे।
पुलिस और प्रशासन की भूमिकाझड़प के बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और पूरे खदान क्षेत्र में फ्लैग मार्च तथा निगरानी बढ़ा दी गई है।
जिला मुख्यालय से अपर कलेक्टर सुनील नायक सहित राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए बातचीत के जरिये समाधान निकालने की बात कही।
पृष्ठभूमि और पुराने विवादएसईसीएल की अमेरा खदान विस्तार योजना को लेकर लखनपुर क्षेत्र के परसोड़ीकला, कटकोना सहित आसपास के गांवों में कई महीनों से विरोध प्रदर्शन, धरना और रुक-रुक कर झड़पों की घटनाएं होती रही हैं, जिनसे खदान में उत्पादन भी कई बार बाधित हुआ है।
इससे पहले भी मिट्टी खुदाई और सड़क निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीणों ने पोकलेन मशीनों को घेरकर कंपनी के मैनेजर और मशीन ऑपरेटरों से मारपीट की थी, जिसके मामले में पुलिस में अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं।
आगे की स्थितिमौजूदा तनाव को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था भंग करने वालों पर कार्रवाई होगी, साथ ही प्रभावित ग्रामीणों की आपत्तियां और पुनर्वास-सुरक्षा संबंधी मांगें औपचारिक स्तर पर सुनी जाएंगी।
खदान एक्सटेंशन प्रोजेक्ट की अगली प्रक्रिया प्रशासनिक समीक्षा, सुरक्षा आकलन और प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ पुनः वार्ता के बाद तय किए जाने की संभावना जताई जा रही है।










