
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ईडी की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिसके बाद अब चैतन्य को जेल में ही रहना होगा।
जानकारी के मुताबिक, उनकी जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा था। आज फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया।
इससे पहले, एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने 15 अक्टूबर को रिमांड खत्म होने के बाद चैतन्य को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया था, जिसके बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया था। वे 29 अक्टूबर तक जेल में रहेंगे।
ईडी ने 18 जुलाई, यानी चैतन्य बघेल के जन्मदिन के दिन ही, उन्हें भिलाई स्थित निवास से PMLA, 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद मिले, जिनका उपयोग उन्होंने अपनी रियल एस्टेट फर्मों में किया। यह पैसा ठेकेदारों को नकद भुगतान और बैंक प्रविष्टियों के जरिए निवेश किया गया था।
साथ ही उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” के तहत फर्जी फ्लैट खरीद के माध्यम से 5 करोड़ रुपये की अप्रत्यक्ष रकम प्राप्त की। बैंक ट्रेल में यह सामने आया कि त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने शराब सिंडिकेट से भुगतान लेकर आगे ट्रांसफर किया था।
इस मामले में पहले से ही कई बड़े नाम गिरफ्त में हैं, जिनमें पूर्व IAS अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी, और पूर्व मंत्री व विधायक कवासी लखमा शामिल हैं।
ईडी फिलहाल पूरे घोटाले की गहन जांच कर रही है।










